कोरोना वायरस को लेकर भ्रांतियों से बचे, डब्लूएचओ ने शेयर की जानकारी

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जैसे-जैसे कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसे लेकर भ्रांतियां भी फैल रही हैं। कोरोना को महामारी घोषित करने के साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए जानकारी शेयर की है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अभी तक कोरोनावायरस की दवाइयां मौजूद नहीं है। वैज्ञानिक अभी इस वायरस को मारने या उससे बचाने के लिए वैक्सीन तैयार करने में लगे हैं. हालांकि, इलाज के कुछ तरीके भी अंडरट्रायल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोनावायरस किसी भी वातावरण में फैल सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कि गर्म और उमस भरा वातावरण हो। संगठन ने कहा है कि वातावरण पर ध्यान न दें। हाइजीन मेंटेन करें, हाथों की सफाई करते रहें। यह वायरस किसी भी वातावरण में आपको संक्रमित कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि ठंडी और बर्फ में कोरोनावायरस नहीं मरता या कोई भी वायरस किसी भी तापमान में मारा जा सकता है, अगर उसे उसके अनुकूल वातावरण न मिले। सामान्य तौर पर इंसानी शरीर का तापमान 36.5 से 37 डिग्री सेल्सियस पर रहता है। यह तापमान बाहरी वातावरण से ज्यादा प्रभावित नहीं होता। कोरोना वायरस गर्म पानी में भी सर्वाइव कर सकता है। इसलिए ये झूठ है कि गर्म पानी में नहाने से कोरोना नहीं फैलता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि अभी तक ऐसी कोई सूचना या जानकारी नहीं मिली है कि मच्छरों से कोरोना वायरस नहीं फैलता। कोरोना वायरस हवा में तैरते पानी के बूंदों से फैलता है, चाहे वह छींक हो या खांसी। जब कोई छींकता या खांसता है तो उसके मुंह या नाक से निकलने वाली थूक की बूंदों से कोरोना वायरस फैलता है। वहीं हैंड ड्रायर्स से कोरोना वायरस नहीं मरता। हाथपर मौजूद बैक्टीरिया या वायरस अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर के धुलने से ही जाएंगे. या फिर साबुन से हाथ को अच्छी तरह से साफ करें। थर्मल गन या थर्मल स्कैनर द्वारा इंसानी शरीर के बढ़े हुए तापमान को बिना छुए बताया जाता है, अगर थर्मल स्कैनर ने बताया कि आपके शरीर का तापमान ज्यादा है इसका मतलब ये हैं कि आप कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं, इससे यह पता नहीं चलता कि आपको कोरोनावायरस का संक्रमण हैं या नहीं। कोरोना वायरस की जांच होने के बाद ही पता चलेगा कि आप संक्रमित हैं या नहीं। वहीं अल्कोहल या क्लोरीन छिड़कने से शरीर पर मौजूद कोरोना वायरस खत्म नहीं होगा, क्योंकि यह दोनों चीजें शरीर के ऊपर सफाई करते हैं, कोरोना वायरस शरीर के अंदर जाने के बाद सिर्फ दवाइयों से ही ठीक हो सकता है। निमोनिया की वैक्सीन जैसे- न्यूमोकोकल वैक्सीन और हीमोफिलस इनफ्लुएंजा टाइप बी (Hib) वैक्सीन से कोरोना वायरस का इलाज नहीं हो सकता। इससे कोरोना से बचाव नहीं होगा, कोरोना वायरस पूरी तरह से अलग है. यह नया है और अभी तक इसकी दवा खोजी नहीं गई है। वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन विकसित करने में लगे हैं। सैलाइन से नाक साफ करने पर आपको कोरोनावायरस के संक्रमण से निजात या बचाव नहीं मिलता। यह एक आदमी से दूसरे आदमी में फैलता है, वह भी छींक या खांसी आने से मुंह और नाक से निकलने वाली थूक या म्यूकस की बूंदों से। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि लहसुन बेहद सेहतमंद खाद्य पदार्थ है, इसमें कई एंटी माइक्रोबियल तत्व होते हैं, लेकिन अभी तक ऐसे प्रमाण नहीं मिले हैं, जिससे यह पता चले कि लहसुन खाने से लोग कोरोना वायरस से बच सकते हैं। कोरोना वायरस से सभी उम्र के लोग संक्रमित हो सकते हैं। सभी उम्र के लोग इस वायरस के हमले से परेशान हो सकते हैं। बुजुर्गों के साथ अन्य समस्याएं जैसे- अस्थमा, डायबिटीज, दिल की बीमारियां कोरोना वायरस के संक्रमण को और प्रभावी बना देती है, इससे उन्हें खतरा ज्यादा होता है, जबकि युवाओं के साथ ऐसा नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस को ठीक करने के लिए एंटीबॉयोटिक्स काम नहीं करते, ये दवाइयां सिर्फ बैक्टीरिया को मारती हैं, वायरस को नहीं। एंटीबॉयोटिक्स का उपयोग कोरोना के लिए नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कोविड 10 नया वायरस है। अगर कोई अस्पताल में भर्ती है तो उसे ये दवाइयां दी जा सकती हैं ताकि बैक्टीरियल इंफेक्शन न हो।