मुहब्बत में तेरी- राम सेवक वर्मा

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मुहब्बत में तेरी जिए जा रहा हूँ
गमे अश्क अपने पिए जा रहा हूं
दिया है ज़माने ने दर्द ये मुझको,
होठों को अपने सिए जा रहा हूँ

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वक्त की शय पर रखी हमने ज़िंदगी,
मात का खेल अपनों ने ही कर दिया
चंद खुशियां सहेजी थीं कल के लिए,
दुःख के कांटों से दामन मेरा भर दिया

-राम सेवक वर्मा
कवि, पत्रकार, लेखक एवं गीतकार
विवेकानंद नगर पुखरायां कानपुर देहात उत्तरप्रदेश-209111