गुरु पूर्णिमा आज, गुरु पूजन कर शिष्य लेंगे आशीर्वाद

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गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर बताया गया है, क्योंकि गुरु ही हैं जो इस संसार रूपी भव सागर को पार करने में सहायता करते हैं। गुरु के ज्ञान और दिखाए गए मार्ग पर चलकर व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है। हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को गुरु का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। आज पूरे देश में गुरु पूर्णिमा हर्षोल्लास से मनाई जा रही है।
शास्त्रों के अनुसार महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिवस भी गुरु पूर्णिमा के दिन माना जाता है। वे संस्कृत के महान विद्वान थे और महाभारत जैसा महाकाव्य उन्होंने ही लिखा था। इसी के अठारहवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण गीता का उपदेश देते हैं। सभी 18 पुराणों का रचयिता भी महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। वेदों को विभाजित करने का श्रेय भी इन्हीं को दिया जाता है। इसी कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था। वेदव्यास को आदिगुरु भी कहा जाता है, इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन ही चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस लिहाज से आज 16 जुलाई की शाम 4:31 बजे से ही सूतक लगने जा रहा है। ऐसे में आपको इस समय से पहले ही गुरू की पूजा कर लेनी होगी। सूतक काल में मूर्ति पूजा या किसी और शुभ कार्य को करने की मनाही होती है। चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पूर्व लग जाता है।