बेटी की पुकार- वीरेन्द्र तोमर

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मैं तेरे आंगन का खिलौना
घर रौनक लेकर आऊंगी

खुशियां सदा मैं चाहूं तेरी
बिटिया तेरी कहे लाऊंगी

घर होगी अगर सोने की तंगी
तो नीचे ही सो जाऊंगी

रुखा सुखा घर में जो होगा
गुजारा उसी से कर लूंगी

जब मैं बड़ी हो जाऊं बाबुल
नाम तेरा रोशन कर आऊंगी

मैं भैया तेरे प्यार की भूखी
तेरे हाथ में राखियां बांधूगी

शादी मेरी जहां करोगे
हंसी खुशी में जाऊंगी

किस्मत से सब अपनी जीते
कोई किसी का ना खाता

बेटी से घर रोशन होते
समाज सभी को सिखलाता

स्मृति-माया-ममता-जयललिता
सुषमा-उमा-इन्दिरा भी जन्मी है

सुशीला-बेदी-प्रतिभा जैसी बेटी
मा ही की कोख में जन्मी है

आने दो मुझे धरती पर
कुछ अनोखा वन दिखलाऊंगी

वैभव यश कीर्ति की चर्चा
चारों दिशाओं में फैलाऊंगी

बेटी बचाओ पढ़ाओ का नारा
सरकार हमारी कहती है

कुल की रोशनी होती बेटी
निज किस्मत से वह जीती है

-वीरेन्द्र तोमर
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