ज्योतिषीय विश्लेषण: अगर हुआ भारत-चीन में युद्ध तो कौन होगा विजयी?

190

भारत और चीन की सीमा पर निरंतर विवाद चल रहा है। भारत के शत्रु शनि से प्रभावित देश होंगे और शनि कुंडली में यवन जातियों का प्रतिनिधित्व करता है। चीन और पाकिस्तान दोनों ही यवन प्रधान देश है। अतः यह दोनों ही भारत के दुश्मन हैं।

भारत की कुंडली में बुध लग्नेश है। अतः इसकी दशा अंतर्दशा प्रत्यंतर दशा में भारत अत्यंत मजबूत रहता है एवं जीत भी मिलती है। भारत की कुंडली में 29 अगस्त को मंगल की महादशा में शनि के अंतर में चंद्र के प्रत्यंतर में राहु की दशा प्रारंभ हुई, जो कि 3 सितंबर तक रही। इसी कारण उस समय भारत और चीन का एक बार पुनः झड़प हुई। चंद्रमा की प्रत्यंतर के कारण इसमें भारत की विजय हुई। इसके उपरांत पुनः मंगल, शनि, चंद्रमा में शनि की सूक्ष्म दशा 8 सितंबर से प्रारंभ होकर 13 सितंबर तक रही।

इस बीच में भारत और चीन में फिर से विवाद हुआ। परन्तु चंद्रमा की प्रत्यंतर दशा होने के कारण भारत विजयी हुआ। इसके आगे पुनः मंगल शनि में चंद्रमा की प्रत्यंतर दशा में शुक्र की सूक्ष्म दशा 20 सितंबर से प्रारंभ हो रही है जोकि दिनांक 25 सितंबर तक रहेगी।

इस समय फिर से छोटी मोटी झड़पें होंगी, जिसमें भारत विजयी रहेगा। इसके अलावा 29 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच 5 अक्टूबर से 9 अक्टूबर के बीच 14 अक्टूबर से 18 अक्टूबर के बीच लगातार छोटी मोटी झड़पें होंगी एवं सभी में भारत विजयी रहेगा।

21 अक्टूबर से मंगल की महादशा में शनि की अंतर्दशा में राहु का प्रत्यंतर प्रारंभ हो रहा है, जो कि 20 दिसंबर तक है। यह पूरा समय युद्ध की आशंकाओं का समय होगा। भारत सरकार को चाहिए कि इस समय वह पूरी तरह से सावधान रहें तथा इसके पहले उसके सैनिक भारत और चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर पूरी ताकत के साथ तैनात रहे।

इस समय हमारे साथ चीन और पाकिस्तान के द्वारा धोखा किया जाएगा। अतः अगर हम सतर्क रहें तो हम तत्काल बिजयी हो जाएंगे, अन्यथा विजयी होने में थोड़ा समय लगेगा। यह भी संभव है इस इस अवधि के थोड़ा पहले तथा इस अवधि में चीन यह बताने की कोशिश करेगा कि वह पीछे हट रहा है, परंतु एकाएक  वह आगे आने की तत्काल कोशिश करेगा।

20 दिसंबर से मंगल की महादशा में शनि की अंतर्दशा में गुरु का प्रत्यंतर प्रारंभ हो रहा है। गुरु का प्रत्यंतर यह बताता है कि उस समय हमें पढ़े-लिखे वर्ग ज्ञानी वर्ग अर्थात अमेरिका, इंग्लैंड आदि देशों का हमें समर्थन मिलेगा।

परंतु इस समय काल में भी 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक का समय पुनः छोटी लड़ाई का है। इसके अलावा 16 जनवरी से 25 जनवरी तक 4 फरवरी से 12 फरवरी तक का समय फिर से टकराव का है। मंगल की महादशा में बुध की अंतर्दशा में बुद्ध का प्रत्यंतर 12 फरवरी 2021 से प्रारंभ हो रहा है और यह समय भारत के लिए अत्यंत अच्छा रहेगा।

इस समय में भी कुछ समय काल जैसे 23 फरवरी से 3 मार्च तक 13 मार्च से 21 मार्च तक एवं 28 मार्च से 5 अप्रैल तक का समय काफी छोटे टकराव का है। यह संभव है इस बीच अर्थात 12 फरवरी 2021 से 5 अप्रैल 2021 के बीच में हमको अपनी कुछ खोई जमीन पर वापस कब्जा मिल जाए।

चीन और पाकिस्तान से निकट भविष्य में पूर्णतया शांति भारत की कुंडली में शनि के शत्रु भाव के स्वामी होने के कारण संभव नहीं है। भारत को सदैव ही इन दोनों देशों से सतर्क रहना चाहिए।

जय माँ शारदा
ज्योतिषाचार्य पंडित अनिल पांडेय
आसरा ज्योतिष, सागर,
मध्य प्रदेश

https://youtu.be/w1Qr-hde8ZM