बीजेपी, कांग्रेस ने विज्ञापनों में खर्च किये एक हज़ार करोड़ से अधिक

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राजनैतिक पार्टियां किसी से भी चंदा लेने में गुरेज़ नहीं करती, वहीं पार्टी का प्रचार करने भी पानी की तरह पैसा बहाती हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया है कि नोटबंदी के साल में भारतीय जनता पार्टी ने 1034 करोड़ रुपये और कांग्रेस ने 225 करोड़ रुपये चंदे से कमाए थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2015-16 और 2016-17 में भाजपा की कमाई में 81.18 फीसदी (463.41 करोड़ रुपये) की वृद्धि हुई थी। नोटबंदी के तीन महीने के बाद हुए यूपी में विधानसभा चुनाव भी हुए थे। भाजपा ने इस दौरान 710 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च किये थे, वहीं कांग्रेस ने 321.66 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए थे।
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार सात राष्ट्रीय दलों भाजपा, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और तृणमूल कांग्रेस की कुल घोषित आय 1,559.17 करोड़ रुपये रही, जबकि इन पार्टियों ने 1,228.26 करोड़ रुपये खर्च किए। चुनाव आयोग में दाखिल विवरणों पर आधारित तैयार रिपोर्ट से भाजपा और कांग्रेस की कुल आय, उनके व्यय और आय के स्रोत की तुलना की गई है। वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2016-17 के बीच भाजपा की आय 570.86 करोड़ रुपये से 81.18 प्रतिशत 463.41 करोड़ रुपये बढ़कर 1034.27 करोड़ रुपये हो गई, वहीं कांग्रेस की आय 261.56 करोड़ रुपये से 14 प्रतिशत 36.20 करोड़ रुपये घटकर 225.36 करोड़ रुपये रह गई। बीजेपी ने 2016-17 में 710.05, कांग्रेस ने 321.66 करोड़ रुपये खर्च किए, जो उसकी इस दौरान की कुल आय से 96.30 करोड़ रुपये अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी ने 2016-17 के दौरान 997.12 करोड़ रुपये की आय का स्रोत अनुदान, चंदा या आर्थिक सहयोग बताया। यह राशि भाजपा की कुल आय का 96.41 फीसदी है। कांग्रेस की सर्वाधिक कमाई 115.644 करोड़ रुपये उसके द्वारा जारी किए गए कूपनों से हुई है। यह उसकी कुल कमाई का 51.32 फीसदी है। इस दौरान सात राष्ट्रीय पार्टियों ने 2016-17 के दौरान स्वैच्छिक योगदान से 74.98 फीसदी 1,169.07 करोड़ रुपये धनराशि अर्जित की, जबकि इसके पिछले वित्तीय वर्ष 2015-16 में स्वैच्छिक योगदान से उनकी आमदनी 60 फीसदी 616.05 करोड़ रुपये रही थी। इन दलों ने 2016-17 में बैंकों से ब्याज के रूप में 128.60 करोड़ रुपये प्राप्त किए।