18600 करोड़ रुपये की लागत से 148 किलोमीटर लम्बे बैंगलुरु उप-नगरीय परिवहन परियोजना का प्रस्ताव

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प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस 2019 में कहा था कि अगले पांच वर्षों के दौरान अवसंरचना पर 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस संबंध में केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त वर्ष 2020-21 का केन्‍द्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि मैंने 31 दिसंबर, 2019 को 103 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले राष्ट्रीय अवसंरचना पाइप लाइन का शुभारंभ किया। इस परियोजना में विभिन्न क्षेत्रों के 6500 परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं का वर्गीकरण विकास के चरण और उनके आकार के आधार पर किया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी अवसंरचना विशेष पर आधारित कौशल विकास अवसरों पर विशेष ध्यान देगी। भारतीय युवाओं के लिए विनिर्माण, परिचालन और अवसंरचना के रख-रखाव के क्षेत्र में रोजगार के आपार अवसर मौजूद है।
केन्द्रीय बजट में अवसंरचना परियोजनाओं के लिए परियोजना तैयारी सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है। इस कार्यक्रम में युवा इंजीनियरों, प्रबंध स्नातकों और विश्वविद्यालयों के अर्थशास्त्रियों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा। बजट में स्टार्ट-अप्स से युवा शक्ति को जोड़ने के लिए सरकार की सभी अवसंरचना एजेंसियों का निर्देश देने का प्रस्ताव है।
वित्त मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति जल्द ही जारी की जाएगी। इससे केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों और प्रमुख नियामकों की भूमिकाएं स्पष्ट होंगी और यह एकल खिड़की ई-लॉजिस्टिक बाजार का निर्माण करेगी। यह नीति रोजगार सृजन, कौशल और एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी बनाने पर विशेष ध्यान देगी।
केन्द्रीय बजट 2020-21 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राजमार्गों का तेजी से विकास किया जाएगा। इनमें 2500 किलोमीटर लम्बे पहुंच नियंत्रण राजमार्गों, आर्थिक गलियारों (9000 किलोमीटर), तटीय और पत्तन पहुंच सड़कों (2000 किलोमीटर) तथा रणनीतिक राजमार्गों (2000 किलोमीटर) के निर्माण शामिल हैं। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे और अन्य एक्सप्रेस-वे को 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा। चेन्नई-बैंगलुरु एक्सप्रेस-वे को भी शुरू किया जाएगा। 2024 से पहले 6000 किलोमीटर की लम्बाई वाले 12 राजमार्ग समूहों के मुद्रीकरण का प्रस्ताव दिया गया है।
वित्त मंत्री ने वर्तमान सरकार के गठन के 100 दिनों के अंदर रेलवे की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने रेल अवसंरचना को बेहतर बनाने के उपायों का प्रस्ताव दिया-
• रेल लाइनों के किनारे बड़ी सौर ऊर्जा क्षमता की स्थापना।
• 4 स्टेशनों की पुनर्विकास परियोजनाएं और पीपीपी के माध्यम से 150 यात्री ट्रेनों का संचालन।
• आईकॉनिक पर्यटन गंतव्य को जोड़ने के लिए तेजस जैसी ट्रेने।
• मुम्बई और अहमदाबाद के बीच हाईस्पीड ट्रेन पर सक्रियता से काम।
• 148 किलोमीटर लम्बी बेंगलुरु उप-नगरीय परिवहन परियोजना के लिए 18,600 करोड़ रुपये, मेट्रो प्रारूप के अनुसार किराया तय किया जाएगा। केन्द्र सरकार 20 प्रतिशत का लागत वहन करेगी और परियोजना लागत का 60 प्रतिशत बाहरी सहायता से उपलब्ध कराने की सुविधा देगी।
उन्होंने कहा कि जल्द ही खराब होने वाली सब्जियों व फलों के लिए राष्ट्रीय कोल्डचैन के निर्माण के उद्देश्य से वित्त मंत्री ने प्रस्ताव दिया कि भारतीय रेल पीपीपी मोड के जरिए कृषि रेल की स्थापना करेगा। एक्सप्रेस ट्रेनों और मालगाड़ियों में प्रशीतन सुविधायुक्त डब्बे लगाए जाएगे।