27 ओर 62 दिन के बाद अब 2 दिन वाले सीएम बने येदियुरप्पा, आखिरकार कर्नाटक का नाटक हुआ समाप्त

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कांग्रेस और जेडी की सरकार, के साथ भाजपा की हार। आज के फ्लोर टेस्ट के बाद आखिरकार कर्नाटक के नाटक भी फिलहाल तो समाप्त हो गया हैं। मगर इस नाटक के दौरान भाजपा के सिपहसलार सीएम की कुर्सी में बैठ कर हटने वाले येदियुरप्पा की किस्मत एक बार नही तीसरी बार धोखा दे गई? एक बार 27 दिन फिर 62 ओर अबकी बार मात्र 2 दिन के सीएम कहलाने वाले येदुरप्पा भाजपा की कठपुतली बन ही गए। अब एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर किसने येदियुरप्पा को बलि चढ़ाया।
कर्नाटक के पॉलिटिकल ड्रामे में टेस्ट से पहले ही बीजेपी सरकार फ्लोर पर आ चुकी है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का दम ओर राज्यपाल वजुभाई वाला की वफादारी के भरोसे दांव खेलने का भ्रम सीधे पीएम नरेंद्र मोदी की असफलता में जुड़ गया हैं। इस बीच कॉग्रेस ओर जेडीएस की सरकार बनते ही कोंग्रेस के सुप्रीमो राहुल गांधी ने पीएम श्री मोदी पर बड़ा पलटवार करते हुए उन्हें लोकतंत्र का हत्यारा ओर सबसे बड़ा भ्रस्टाचारी करार दिया हैं। इस बयान के बाद राहुल गांधी का एक नया अवतार नजर आया हैं।
अब बात करे भाजपा सरकार और उसके नेता येदियुरप्पा की तो येदियुरप्पा जब इस बात को बेहतर जानते थे कि उनके पास सरकार बनाने लायक आंकड़े नही हैं तो फिर किस ओर कीस्जए डैम पर कुर्सी स्वाद चखने की इतनी हिम्मत दिखा दी। इस हार से जितना नुकसान भाजपा का हुआ हैं उससे कही अधिक तो येदियुरप्पा का हुआ है जो इन कर्णधारो के भरोसे तीसरी बार असफल सीएम कहलाने के हकदार हो गए है। कई राज्यों में सरकारें बनाने का घोर अभिमान भी अमित शाह के सिर चढ़कर बोल रहा था। राज्यपाल ने बीजेपी की तय योजना के हिसाब से भाजपा को सरकार बनाने का न्योता देते हुए बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय भी दे दिया। कांग्रेस और जेडीएस में तोड़फोड़ के लिए शाह की टीम को इतना वक्त मिल जाना काफी भी था, लेकिन सियासत के चतुर खिलाड़ी अमित शाह इस बार कांग्रेस की पुख्ता रणनीति को भांप नही पाए। कांग्रेस ने जेडीएस को न तो समर्थन देने में जरा भी देरी की और न ही बहुमत साबित करने के वक्त गंवाया ओर न ही सुप्रीम कोर्ट जाने में। आधीरात को सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर कांग्रेस ने फ्लोर टेस्ट 24 घंटे के भीतर कराने का फैसला कराकर भाजपा की रणनीति में सेंध तो लगा ही दी थी। इस सेंध के बाद तो भाजपा के लिए सत्ता की राह मुश्किल जान पड़ने लगी थी। घेराबंदी के मामले में कांग्रेस ने एक बार फिर गुजरात मे हुए अहमद पटेल वाले राज्यसभा चुनाव जैसी शैली पर काम किया और अंततः अपने किसी विधायक को टूटने नही दिया। विधायकों को तोड़ने के सभी प्रयासों में सफलता न मिल पाने के बाद भाजपा के दिल्ली दरबार को भी समझ आ गया कि फ्लोर टेस्ट के नतीजे क्या होंगे, इसलिए दिल्ली से येदियुरप्पा को निर्देश मिल गए कि वे सदन में भावुक भाषण के साथ अपना इस्तीफा सौंप दें। दरअसल अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी को भी येदियुरप्पा के शपथ समारोह में आना था लेकिन दोनों नेता जानते थे कि भविष्य में क्या होने वाला है इसलिए उन्होंने शपथ से किनारा कर लिया था। मगर बड़ा सवाल अभी भी यह हैं कि जब सभी नतीजे को लेकर पहले से ही आशान्वित थे तब भाजपा रूपी सरकार में येदियुरप्पा नैतिकता की कौन सी बातें कर पाते। आखिर वो क्या सोचकर शपथ लेने पहुंच गए? अगर देखा जाए तो बीजेपी सत्ता पाने की छटपटाहट में बड़ी राजनैतिक गलती कर गई कि जब आंकड़े नही थे तो बीजेपी को सरकार बनाने की पहल करना ही नही थी। जेडीएस और कांग्रेस की सरकार बनने देना थी और उसके पतन का इंतज़ार करना था।
कर्नाटक के खेल में दूसरी बात यह कि कांग्रेस और जेडीएस का गठजोड़ भी समय की मांग और दोनों दलों की आवश्यक्ता हैं। दोनों दलों ने एक दूसरे को कोसते हुए चुनाव लड़ा और अब भाजपा को सत्ता से दूर करने के लिए हाथ मिला लिए। हालांकि राजनीति में ये खेल कोई नए नही हैं। भाजपा भी गोवा, मणिपुर और बिहार में ये काम कर चुकी है। अब सवाल यह है कि भाजपा पार्टी से ज्यादा सुप्रिमो शाह अपनी खोई प्रतिष्ठा पाने कौन सा नया पैंतरा चलने वाले हैं।
-पी. कुमार