इस वर्ष नहीं दिया जाएगा साहित्य का नोबेल पुरस्कार

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नोबेल पुरस्कार के 117 वर्षों के इतिहास ऐसा दूसरी बार होगा जब इस वर्ष साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाएगा। इससे पूर्व इसे 1943 में द्वितीय विश्व युद्ध को लेकर ये पुरस्कार स्थगित किया जा चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोबेल पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था एक सेक्स स्कैंडल में फंस गई है। यह अकादमी 1901 से ही साहित्य नोबेल पुरस्कार विजेताओं का चयन कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्टॉकहोम में एक प्रभावशाली सांस्कृतिक क्लब प्रमुख फ्रांसीसी जीन क्लाड अर्नाल्ट पर बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। क्लाड अर्नाल्ट पर मी टू अभियान के दौरान 18 महिलाओं ने पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। अर्नाल्ट का विवाह अकादमी के एक सदस्य से हुआ है। अकादमी के एक आंतरिक जांच में भी उनके और संस्थान के बीच हितों के टकराव का खुलासा हुआ। अकादमी ने उनके क्लब को वर्षों तक वित्तपोषण किया। 2018 के लिए पुरस्कार विजेताओं की घोषणा 2019 के पुरस्कार के साथ ही की जाएगी।
विजेता का चुनाव करने वाली स्वीडिश एकेडमी की ज्यूरी मेंबर कटरीना के पति पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं, इसीलिए 2018 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता के नाम पर मुहर नहीं लग पाई। कटरीना के पति और फ्रांसीसी फोटोग्राफर जेन क्लोड अरनॉल्ट पर लगे यौन शोषण के आरोपों के चलते स्वीडिश एकेडमी आलोचनाओं के घेरे में है। एकेडमी ने फैसला किया है कि इस साल यह पुरस्कार प्रदान नहीं किया जाएगा, क्योंकि एकेडमी के कुछ सदस्य पुरस्कार प्रदान करने को लेकर चिंतित हैं और वे इसके लिए स्थिति को अनुकूल नहीं बता रहे हैं। पिछले साल नवंबर में 18 महिलाओं ने मी टू अभियान के जरिए से अरनॉल्ट पर यौन हमला व उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। हालांकि अरनॉल्ट ने सभी आरोपों से इनकार किया है। अरनॉल्ट की पत्नी कटरीना लंबे समय से एकेडमी की सदस्य रही हैं, लेकिन मामला सामने आने के बाद संगठन ने उनकी पत्नी को निकाल दिया था। स्वीडिश एकेडमी ने कहा कि यौन शोषण के आरोपों से जनता के बीच संस्था की छवि खराब हुई है।