भारत माता की जय बोलो: रकमिश सुल्तानपुरी

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देशभक्ति बस एक धर्म हो
मंदिर मस्ज़िद वालो
नर- नारी भारतवासी में
देशप्रेम भर डालो
जाति -पाति का
भेद मिटाकर
मानवता का अमृत घोलो
भारत माता की जय बोलो

धर्म श्रेष्ठ यह देशभक्ति है
कर्म करो तुम देशज
चारोधाम सा फल मिलता है
हो जाता इसमें हज
देश रहेगा
जाति रहेगी
सच्चाई से मन को धो लो
भारतमाता की जय बोलो

जाति- पाति में बटा मिला था
देश बड़ी मुश्किल से
बाँट रहे क्यों राजनीति से
वतन हमारा फिर से
आओ मिलकर
करें सामना
राख़ नही अंगारे हो लो
भारत माता की जय बोलो

तोड़ सभी अनुबन्ध झूठ के
मात्र बनो तुम इंसां
मानवता का पाठ पढ़ो तुम
पावन सत्य अहिंसा
पड़ी हुई है
इस समाज में
कट्टरता की गाँठें खोलो
भारत माता की जय बोलो

गाती रहती गीत प्रेम की
कलरव करती गंगा
भरता है हुंकार विश्व में
विजयी विश्व तिरंगा
आओ इसे
प्रणाम करें हम
चरण भारती माँ के छू लो
भारत माता की जय बोलो

रकमिश सुल्तानपुरी