माँ सब जानती है- सोनल ओमर

202

निशी एक सामान्य सी लड़की है। हमेशा अपने आप मे ही रहती है। हमेशा अपने फ्लैट में रहना। परिवार जनों से भी सिर्फ काम की बात करना, थोड़ा बोलना। उसके ज्यादा दोस्त भी नहीं है। उसको अपनी बात अपनी भावनाएं दूसरों को समझाने में तकलीफ होती है। उसे ऐसा लगता है जैसे उसे कोई समझता ही नहीं। अपने अंतर्मुखी स्वभाव के करण वो अक्सर डिप्रेस्ड रहती है। पर निशी की एक खास बात है वो अपने अंदर चल रहे तूफ़ान को कभी किसी को पता नहीं चलने देती। हमेशा मुस्कुराती रहती है। कई लोगों को तो उसकी मुस्कान से जलन भी हो जाती है कि कैसे वो हर परिस्थिति में मुस्कुरा सकती है।

एक बार निशी ने अपनी माँ से पूछा…. माँ मैं बिल्डिंग की छत पर जाऊं? खुली हवा में थोड़ी देर जाने का मन है।

नहीं जाना है।

पर क्यूँ? तुम मुझे छत पर क्यूँ नहीं जाने देती हो? माना कि बिल्डिंग में बहुत सारे लोग हैं, पर कोई मुझे खा नहीं जायेगा और छत पर तो कोई नहीं होता। उस दिन बारिश हो रही थी तब भी अपने जाने नहीं दिया। आप नीचे गली में भेजने को तैयार थी पर छत पर नहीं।

आखिर छत पर ऐसी क्या बुराई है?

मुझे डर लगता है कि कहीं तुम छत से कूद न जाओ। तुम जिस प्रकार से रहती हो पता नहीं तुम्हारे अंदर क्या चलता हो!

इतना सुनकर निशी स्तब्ध रह गयी। कुछ सेकंड्स तक वो अवाक होकर माँ की आँख में देखती रही, फिर उसने नज़रे झुका ली। निशी यही सोच रही थी कि उसकी मुस्कान के पीछे की बात भी माँ समझ गई। उस दिन उसे पता चला की वो बताये या न बताये लेकिन कोई है जो उसके पल पल की खबर रख रहा हैं।

-सोनल ओमर
कानपुर, उत्तर प्रदेश