रोटी- सुरेंद्र सैनी

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आज कोर्ट में एक अठारह साल के लड़के राम का केस आया। उसने एक दुकान से चोरी की थी। हर कोई बेचैन हो रहा था की इतने छोटे बच्चे को जज क्या सज़ा देंगे। लड़के को कटघरे मे खड़ा किया गया। जिरह शुरू हुई। वकीलो की दलील चलती रही। उसके बाद जज ने लड़के से पूछा तुम बालिग़ हो आखिर तुमने चोरी क्यों की?
साहब बस दो रोटी के लिए। दो दिनों से कुछ खाया नहीं है, सोचा कुछ काम मिल जाएगा, लेकिन जहाँ भी काम मांगने गया सबने बच्चा समझकर काम देने से मना कर दिया। जबकि मैं 18 साल का बालिग़ हूँ। सभी को लगा, मैं झूठ बोल रहा हूँ। साहब जब भूख हद से ज़्यादा बढ़ गयी, तब मुझे चोरी के अलावा कुछ ना सूझा। कृपया आप मुझे जेल भेज दें, कम से कम वहाँ मुझे रोटी तो मिल जाएगी, लड़के की बात सुनकर जज भी रोटी के सवाल पर सोचने को मजबूर हो गए।

-सुरेंद्र सैनी बवानीवाल ‘उड़ता’
झज्जर, हरियाणा
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