तेरी यादें- शैली अग्रवाल

61

अक्सर वो मुझे पागल कहती थी,
अजीब सी उसकी मोहब्बत थी
कुछ दिल में छिपाकर रखती थी,
नादान परिंदे को क्या खबर थी,
उस पागल से प्यार वो भी करतीं थी

आज फिर वही महीना, वही तारीख है
बस तू नहीं है पास मेरे, तेरी यादें सारी है

दर्द में इतना दर्द है की,
दर्द को भी दर्द से दर्द होने लगा

-शैली अग्रवाल