Friday, April 24, 2026
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कभी विश्व में सबसे शक्तिशाली इंजन था चित्तरंजन रेल इंजन कारखाने में बना सम्राट हेरिटेज लोको नंबर 517 ZDM5

ओल्ड इज गोल्ड की कहावत तो आप सभी ने सुनी होगी। भारतीय रेलवे भी अपनी पुरानी यादों को सहेज व संजोकर भविष्य में आने वाले पीढ़ी के लिए संरक्षित एवं सुरक्षित रखने में पीछे नही है। पश्चिम मध्य रेल ने भी अपनी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए एक सराहनीय कार्य किया है।

पश्चिम मध्य रेल मुख्यालय कार्यालय के उद्यान में स्थापित भारतीय रेलवे की बहुमूल्य विरासत रेल इंजन ‘सम्राट हेरिटेज लोको नंबर 517 ZDM5’ के बारे में उल्लेखनीय जानकारी है कि डीजल लोकोमोटिव नंबर 517 ZDM5 भारतीय रेलवे के कारखाना चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (सीएलडब्लू) द्वारा वर्ष 1991 में निर्मित हुआ था।

धौलपुर शेड के इस लोकोमोटिव ने 33 वर्षों तक भारतीय रेल के मध्य भारत के विभिन्न मार्गों पर निरंतर अपनी सेवायें प्रदान करते हुए देश के रेल परिवहन इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस लोकोमोटिव में डीजल-इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन के साथ-साथ 450 एचपी का इंजन लगा था, जिससे यह लोकोमोटिव 50 किमी प्रति घंटे की गति से चलने में सक्षम था। उस समय यह नैरो गेज लोकोमोटिव विश्व में सबसे शक्तिशाली लोकोमोटिव के नाम से भी प्रचलित था।

महाप्रबंधक कार्यालय उद्यान में पश्चिम मध्य रेल महाप्रबंधक श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय के कर-कमलों द्वारा गुरुवार 23 जनवरी 2025 को सम्राट हैरिटेज लोको स्मारक का अनावरण किया गया।

महाप्रबंधक ने कहा कि भारत की समृद्ध रेल विरासत को संजोये रखने के उद्देश्य से इस लोकोमोटिव को पश्चिम मध्य रेल, मुख्यालय में स्थापित किया गया है, यह लोको रेल कर्मचारियों के साथ-साथ आमजन को रेलवे के प्रति उत्सुकता के लिए प्रेरित करेगा।

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