Madhya Pradesh : जबलपुर। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन – जबलपुर के सहयोग से देवी अहिल्याबाई जयंती समारोह का आयोजन शुक्रवार को मानस भवन प्रेक्षागृह, राइट टाउन, जबलपुर में आयोजित किया गया। यह आयोजन दया और धर्म की प्रतिमूर्ति का 300वाँ जन्मोत्सव समापन वर्ष था।
कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र जामदार, पूर्व उपाध्यक्ष — म.प्र. जन अभियान परिषद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उप संचालक, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद अमित कुमार यादव भी उपस्थित थे। इस अवसर पर देवी अहिल्याबाई होलकर के जीवन, दृष्टिकोण एवं योगदान पर आधारित भव्य नृत्य-नाटिका “पुण्यश्लोक अहिल्याबाई” की प्रस्तुति हुई।
Madhya Pradesh : सरफोजी राजे भोसले बीएनटी एंड आर सेंटर, मुम्बई की यह प्रस्तुति भव्य रंगमंचीय एवं नृत्य-आधारित नाट्य प्रस्तुति थी, जिसकी संकल्पना देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती वर्ष समारोह के उपलक्ष्य में की गई है। संगीत, नृत्य, कथन एवं प्रभावशाली दृश्यांकन के माध्यम से यह प्रस्तुति उनके करुणा, न्याय, सुशासन, आध्यात्मिकता एवं सांस्कृतिक संरक्षण के आदर्शों को उजागर करती है।
Madhya Pradesh : इस भव्य प्रस्तुति में 55 कलाकारों ने देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, दृष्टिकोण एवं योगदान को मंच पर जीवंत किया। इसकी संकल्पना एवं निर्देशन डॉ. संध्या पुरेचा ने की, जबकि संगीत अजीत परब, नृत्य निर्देशन सुभाष नागरे एवं लेखक विवेक आप्टे एवं सुभाष साईंगले हैं।
Madhya Pradesh : मालवा की लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, शासन, धर्मनिष्ठा, लोकसेवा और भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर केंद्रित एक भव्य शास्त्रीय नृत्य-नाट्य है। इसकी मूल भावना अहिल्याबाई को केवल एक शासक नहीं, बल्कि “मातृशक्ति, न्याय, सेवा और भारतीय अस्मिता” के प्रतीक के रूप में स्थापित करना है।
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर का मध्यप्रदेश से संबद्ध होना राज्य के लिये गौरव का विषय है। देवी अहिल्या बाई जहाँ एक कुशल प्रशासक रही हैं। वहीं, धर्मनिष्ठता के प्रति उनके द्वारा किये गए कार्य सम्पूर्ण राष्ट्र को एकसूत्र में पिरोते हैं। भारत के लगभग सभी प्रमुख आध्यात्मिक नगरों में उनके द्वारा नदियों के तटों का निर्माण, मंदिरों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार, धर्मशालाओं का निर्माण आदि कुछ ऐसे कार्य है, जो उन्हें लोकमाता की प्रतिष्ठा प्रदान करते हैं।
Madhya Pradesh : देवी अहिल्याबाई का यह 300वीं जन्म जयन्ती का समापन वर्ष है। भारत सरकार द्वारा विगत वर्ष देवी अहिल्याबाई के सम्मान में 18 महीने तक चलने वाले उत्सहव का शुभारंभ किया है।
इस अवधि में सम्पूर्ण राज्य एवं उन सभी धार्मिक नगरों जहाँ देवी अहिल्याबाई की ओर से विभिन्न कार्य कराये गए हैं, उन-उन स्थलों पर प्रेरणा उत्सव के रूप में विविध सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों को आहूत किये जाने तथा भारत की सभी प्रमुख भाषाओं में लोकमाता के साहित्य का प्रकाशन, लोकमाता के व्यक्तित्व एव कृतित्व के साथ तीर्थ स्थलों के चित्रों सहित कॉफी टेबल बुक के प्रकाशन एवं अन्य विभिन्न गतिविधि की जाना है, जिससे देवी अहिल्या बाई के अवदान के प्रत्येक क्षेत्र से जनसामान्य को प्रेरणा प्राप्त हो सके।











