Saturday, June 6, 2026
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India समेत 60 देशों पर अमेरिका का नया टैरिफ प्रस्ताव

India :एक तरफ अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन भारत समेत 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी में जुटा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने इन देशों के खिलाफ नया शुल्क प्रस्ताव जारी करते हुए कहा है कि उन्होंने जबरन श्रम से तैयार उत्पादों के निर्यात पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
अमेरिकी व्यापार कानून 1974 की धारा 301 के तहत की गई समीक्षा में यूएसटीआर ने दावा किया कि संबंधित देशों की कुछ नीतियां और व्यापारिक प्रथाएं अमेरिकी कारोबार पर अनावश्यक बोझ डालती हैं तथा निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती हैं। इस प्रस्ताव के लागू होने पर भारत सहित कई देशों के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर असर पड़ सकता है।
India : यूएसटीआर, जो अमेरिकी विदेश व्यापार नीति तैयार करने वाली प्रमुख संघीय एजेंसी है, ने कहा कि भारत समेत 54 देश ऐसे उत्पादों के निर्यात को रोकने में विफल रहे हैं, जिनके निर्माण में जबरन श्रम का इस्तेमाल होने की आशंका है. इस सूची में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, चीन, जापान, सऊदी अरब, सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब
अमीरात जैसे देश भी शामिल हैं.

 

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा, हमारे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के निर्यात को रोकने में विफल रहना स्वीकार्य नहीं है. इससे अमेरिकी कामगारों और उद्योगों को असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है.

यूएसटीआर ने इन देशों पर 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है और इस संबंध में सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं. एजेंसी का कहना है कि जबरन श्रम से जुड़े आयातों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं होने से वैश्विक स्तर पर ऐसे श्रम के उन्मूलन के प्रयास कमजोर पड़ते हैं.

यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच एक संभावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, जिनमें बाजार पहुंच, शुल्क संरचना, डिजिटल व्यापार और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई है.

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और चल रही व्यापार वार्ताओं पर इसका प्रभाव पड़ सकता है. हालांकि अंतिम निर्णय से पहले अमेरिकी प्रशासन सार्वजनिक सुझावों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं पर विचार करेगा.

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