Friday, October 23, 2026
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RPF और मेडिकल टीम की तत्परता से घायल रेलकर्मी को मिला समय पर इलाज

RPF : जबलपुर। भारतीय रेल के ‘रेल परिवार’ की भावना और निस्वार्थ मानवता को चरितार्थ करते हुए पश्चिम मध्य रेलवे के इटारसी और भोपाल के रेलकर्मियों ने सूझबूझ और तत्परता की एक अभूतपूर्व मिसाल पेश की है। ऑन-ड्यूटी दुर्घटना का शिकार हुए दूसरे ज़ोन के एक रेलकर्मी की जान बचाने के लिए स्थानीय रेल स्टाफ और अधिकारियों ने न केवल प्रशासनिक सीमाओं से ऊपर उठकर फैसले लिए, बल्कि स्वयं रक्तदान कर कर्मचारी का जीवन सुरक्षित किया।
RPF : घटना का विवरण:

बीते दिन सुबह, ट्रेन संख्या 12628 (कर्नाटक एक्सप्रेस) में ऑन-ड्यूटी तैनात एसी मैकेनिक के. स्टीफन, इटारसी आउटर हनुमान मंदिर के पास एक दर्दनाक दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय RPF स्टाफ, मेडिकल स्टाफ और SSE इलेक्ट्रिक/ETL स्टाफ ने बिना एक पल गंवाए रेलवे एम्बुलेंस के माध्यम से उन्हें तुरंत नजदीकी दयाल मल्टी हॉस्पिटल, इटारसी पहुँचाया।

प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय:

अस्पताल पहुँचने पर संज्ञान में आया कि उक्त अस्पताल का रेलवे से अनुबंध (Empanelment) 30 जून 2026 को ही समाप्त हो चुका था। आपातकालीन स्थिति की गंभीरता और मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए, उपमंडल रेल चिकित्सालय (इटारसी) के MS डॉ. मोहम्मद फरज़ीन ने अद्वितीय प्रशासनिक तत्परता दिखाई।

उन्होंने नियमों की औपचारिकता में उलझने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्राथमिक उपचार (First-Aid) का पूरा खर्च चिकित्सालय स्तर पर स्वयं वहन करने का त्वरित निर्णय लिया, जिससे मरीज का इलाज बिना किसी विलंब के शुरू हो सका।

‘देवदूत’ बनकर आगे आए साथी रेलकर्मी:

प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए मरीज को बेहतर इलाज के लिए सागर मल्टी हॉस्पिटल, भोपाल रेफर किया गया। चूंकि घायल कर्मचारी दूसरे ज़ोन का था और ड्यूटी पर अकेला था, इसलिए उनका कोई परिजन वहाँ उपस्थित नहीं था।

ऐसी विपरीत परिस्थिति में जिम्मेदारी संभालते हुए उपमंडल रेलवे चिकित्सालय के कर्मचारी आयुष बड़कुर एवं इलेक्ट्रिकल ETL विभाग के जूनियर क्लर्क दीपक कनौजिया स्वयं एम्बुलेंस में मरीज के साथ भोपाल गए।

भोपाल के अस्पताल में अत्यधिक खून बह जाने के कारण मरीज के शरीर में रक्त की भारी कमी हो गई। किसी भी रिश्तेदार या रक्तदाता के उपलब्ध न होने पर, इन दोनों जांबाज रेलकर्मियों— आयुष और दीपक—ने बिना किसी संकोच के तुरंत आगे बढ़कर रक्तदान (Blood Donate) किया।

दोनों कर्मचारियों ने अस्पताल में तब तक अपनी उपस्थिति बनाए रखी, जब तक कि मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित नहीं हो गई।

प्रशासन द्वारा सराहना:

पश्चिम मध्य रेलवे प्रशासन RPF, मेडिकल, और SSE इलेक्ट्रिक/ETL स्टाफ की इस त्वरित सूझबूझ और आयुष बड़कुर व  दीपक कनौजिया द्वारा दिखाई गई निस्वार्थ मानवता की भूरि-भूरि प्रशंसा करता है। संकट की घड़ी में कर्तव्य से आगे बढ़कर साथी कर्मचारी की जान बचाना पूरे रेल प्रशासन और समाज के लिए एक महान प्रेरणा-स्रोत है।

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