अजयगढ़ । पन्ना जिले के अजयगढ़ में रेत के कारोबार को लेकर ट्रैक्टर चालकों के दावों के बीच रविवार सुबह अजयगढ़-छतरपुर बाईपास स्थित रेत मंडी के पास एक दस्तावेज सामने आया। कुछ ट्रैक्टर चालकों ने इसे रेत परिवहन से जुड़ी पावती/टोकन बताते हुए दिखाया। दस्तावेज पर “स्टॉक पॉइंट पर गाड़ी पावती—मूल प्रति खदान हेतु पावती” अंकित है। इसमें क्रमांक 50584, दिनांक 03/10/26 और खदान का नाम भानपुर दर्ज है। दस्तावेज में स्टॉक पॉइंट, वाहन, रॉयल्टी क्रमांक, रॉयल्टी मात्रा, वजन और स्टॉक पॉइंट पास क्रमांक के लिए अलग-अलग कॉलम भी बनाए गए हैं।
दस्तावेज सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इसकी वैधता और जारी करने वाली व्यवस्था को लेकर है। क्या यह शासन की अधिकृत रॉयल्टी एवं परिवहन व्यवस्था का हिस्सा है या किसी स्टॉक पॉइंट की स्थानीय व्यवस्था? दस्तावेज पर दर्ज रॉयल्टी क्रमांक और अन्य विवरणों का खनिज विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलान होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
ट्रैक्टर चालकों का दावा है कि संबंधित पावती या टोकन के बिना रेत लेकर आगे जाना मुश्किल होता है। कुछ चालकों ने 5 से 6 हजार रुपये में ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेत मिलने और रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर अतिरिक्त राशि दिए जाने की बात भी कही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी जांच आवश्यक है।
इसके अलावा खेतों से रेत निकालकर लाने तथा मिट्टी मिली रेत के सरकारी और निजी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किए जाने के दावे भी सामने आए हैं। यदि इन दावों में तथ्य है, तो मामला केवल राजस्व और खनिज परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से भी जुड़ सकता है। वहीं, रात के समय ओवरलोड डंपरों के आवागमन को लेकर लगाए जा रहे आरोप भी जांच का विषय हैं।
मौके पर बनाए गए वीडियो में कुछ ट्रैक्टर चालकों ने ‘मल्होत्रा’ नाम के व्यक्ति का भी उल्लेख किया है। हालांकि इस नाम का रेत कारोबार से क्या संबंध है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस पूरे मामले में संबंधित खनिज विभाग, प्रशासन और पुलिस का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण है। दस्तावेज और ट्रैक्टर चालकों के बयान अपने आप में आरोपों की पुष्टि नहीं करते; इनकी जांच और विभागीय रिकॉर्ड से सत्यापन जरूरी है।
इस संबंध में खनिज निरीक्षक शुभम साहू से फोन पर रेत उत्खनन, परिवहन और टोकन व्यवस्था के आधार के बारे में जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि उन्हें खनिज निरीक्षक का प्रभार हाल ही में मिला है और इस संबंध में उन्हें फिलहाल जानकारी नहीं है। उन्होंने सोमवार को जानकारी देने की बात कही है।
अब सवाल यही है कि अजयगढ़ के इस रेत कारोबार में जारी की जा रही पावतियों की वैधता क्या है, रॉयल्टी का वास्तविक हिसाब क्या है और परिवहन व्यवस्था किस नियम के तहत संचालित हो रही है—इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और रिकॉर्ड के सत्यापन से ही सामने आएगा।








