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Akka Web Series Review: कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे की दमदार अदाकारी, लेकिन कमजोर कहानी ने किया निराश

नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई पीरियड क्राइम ड्रामा वेब सीरीज ‘अक्का’ में कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे की दमदार अदाकारी देखने को मिलती है। धर्मराज शेट्टी के निर्देशन और यश राज फिल्म्स के निर्माण में बनी यह सीरीज सत्ता, विरासत, अपराध और धोखे की दिलचस्प कहानी पेश करती है। सीरीज की कहानी आजादी के बाद के दौर के काल्पनिक स्थान पेर्नुरू की है, जहां करीब 800 साल पुराने मालेमार साम्राज्य में सदियों से महिलाओं का शासन चला आ रहा है।
यहां सर्वोच्च शासक महिला को ‘अक्का’ कहा जाता है और सत्ता की उत्तराधिकारी भी महिला ही होती है। कीर्ति सुरेश ने साम्राज्य की शासक भवानी का किरदार निभाया है, जिसकी सत्ता को उस समय चुनौती मिलने लगती है, जब मुंबई से रुद्रा (राधिका आप्टे) वहां पहुंचती है। रुद्रा खुद को भी इस विरासत का हिस्सा बताती है और धीरे-धीरे साम्राज्य के लोगों को अपने पक्ष में करने लगती है। इसके बाद दोनों प्रभावशाली महिलाओं के बीच सत्ता और अधिकारों की ऐसी जंग शुरू होती है, जिसमें धोखे, अपराध और हिंसा की परतें खुलती जाती हैं।
अभिनय की बात करें तो भवानी के रूप में कीर्ति सुरेश ने अपने गंभीर अंदाज और शासकीय रौब से प्रभाव छोड़ा है, वहीं राधिका आप्टे रहस्यमयी और खतरनाक रुद्रा के किरदार में खूब जंचती हैं। दोनों अभिनेत्रियों की स्क्रीन प्रेजेंस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत है। तन्वी आजमी ने भी अपने अभिनय से कहानी को मजबूती दी है, जबकि महेश मांजरेकर, अंशुमन पुष्कर और अन्य सहायक कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है। तकनीकी पक्ष पर नजर डालें तो निर्देशक धर्मराज शेट्टी ने पीरियड ड्रामा का माहौल रचने में अच्छी मेहनत की है।
कलाकारों के परिधान, लुक और भव्य सेट डिजाइन में उस दौर की झलक दिखाई देती है। सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक भी कहानी के वातावरण को प्रभावी बनाते हैं। पांच एपिसोड में समेटी गई यह सीरीज बहुत लंबी नहीं है और इसे आसानी से देखा जा सकता है। हालांकि, मजबूत कलाकारों और शानदार सेटअप के बावजूद ‘अक्का’ की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी पटकथा है। कहानी का कॉन्सेप्ट आकर्षक है, लेकिन कई घटनाएं और किरदारों का व्यवहार पूरी तरह स्वाभाविक नहीं लगता। करीब 800 साल से स्थापित महिला शासन व्यवस्था को एक बाहरी किरदार द्वारा इतनी आसानी से चुनौती देना कहानी को कमजोर बनाता है।
इसके अलावा, भवानी को हथकड़ी लगाकर ले जाए जाने जैसे दृश्यों में लोगों की सीमित प्रतिक्रिया और साम्राज्य में खुलेआम हो रही हिंसा के बावजूद सामाजिक विरोध का अभाव कई सवाल खड़े करता है। कुछ घटनाओं को अधिक तार्किक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता था। कुल मिलाकर, ‘अक्का’ एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट और दमदार कलाकारों वाली सीरीज है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले इसके प्रभाव को कम कर देता है।
यदि आपको पीरियड ड्रामा, महिला प्रधान कहानियां और सत्ता संघर्ष पसंद हैं, तो कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे के शानदार अभिनय के लिए यह सीरीज देख सकते हैं। हालांकि, मजबूत कहानी, बेहतरीन ट्विस्ट और तार्किक घटनाक्रम की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को थोड़ी निराशा हो सकती है।
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