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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर नई व्यवस्था लागू: टिकट और गेट के रंग से पहचानें अपना प्रवेश द्वार

नई दिल्ली. दीपावली और छठ पूजा के दौरान रेलवे स्टेशनों पर उमड़ने वाली यात्रियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्रवेश व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. अब स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को अपनी टिकट श्रेणी के अनुसार निर्धारित रंग वाले गेट से ही प्रवेश करना होगा. इसके लिए प्रवेश द्वारों को नीले, हरे और पीले रंग में बांटा गया है. यानी ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुंचने से पहले यात्रियों को यह जानना जरूरी होगा कि उनकी टिकट किस श्रेणी की है और उन्हें किस गेट से प्लेटफॉर्म तक पहुंचना है.

रेलवे की इस व्यवस्था का उद्देश्य स्टेशन परिसर में अनावश्यक भीड़ को रोकना, यात्रियों की आवाजाही व्यवस्थित करना और प्लेटफॉर्म पर एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने की स्थिति से बचना है. आरक्षित और अनारक्षित श्रेणी के यात्रियों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग निर्धारित किए गए हैं. इसके साथ ही यात्रियों को सीधे प्लेटफॉर्म पर जाने के बजाय पहले होल्डिंग एरिया में इंतजार करना होगा. ट्रेन के निर्धारित समय के अनुसार ही उन्हें प्लेटफॉर्म पर जाने की अनुमति मिलेगी.

नीले, हरे और पीले रंग से पहचानें अपना प्रवेश द्वार

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए तीन रंगों के आधार पर गेट निर्धारित किए गए हैं. स्लीपर और एसी श्रेणी के आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को नीले रंग के प्रवेश द्वार से जाना होगा. प्लेटफॉर्म नंबर 1 से 15 तक जाने वाले ऐसे यात्रियों के लिए गेट नंबर 8 और 11 निर्धारित किए गए हैं.

प्लेटफॉर्म नंबर 16 पर जाने वाले आरक्षित श्रेणी के यात्रियों को हरे रंग के गेट नंबर 10 का इस्तेमाल करना होगा. वहीं सामान्य श्रेणी यानी अनारक्षित टिकट वाले यात्रियों के लिए पीले रंग का प्रवेश द्वार निर्धारित किया गया है. उन्हें प्लेटफॉर्म नंबर 1 से 16 तक जाने के लिए गेट नंबर 12 से प्रवेश करना होगा.

इस व्यवस्था के तहत यात्रियों को अपनी टिकट श्रेणी और प्लेटफॉर्म के अनुसार ही निर्धारित गेट का इस्तेमाल करना होगा. इससे अलग-अलग श्रेणियों के यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी.

प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते

रेलवे ने स्टेशन पर प्रवेश और बाहर निकलने के रास्तों को भी अलग कर दिया है. जिस गेट से यात्री स्टेशन के अंदर प्रवेश करेंगे, उसका इस्तेमाल बाहर निकलने के लिए नहीं कर सकेंगे. इसी तरह निकास के लिए निर्धारित द्वारों का उपयोग केवल स्टेशन से बाहर जाने के लिए होगा.

इस व्यवस्था का उद्देश्य विपरीत दिशा से आने-जाने वाले यात्रियों के कारण पैदा होने वाली अव्यवस्था को रोकना है. त्योहारों के दौरान जब एक ही समय में बड़ी संख्या में यात्री स्टेशन पहुंचते हैं, तब प्रवेश और निकास के रास्तों पर भीड़ बढ़ जाती है. अलग मार्ग निर्धारित होने से यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.

प्लेटफॉर्म पर जाने से पहले होल्डिंग एरिया में करना होगा इंतजार

भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे ने होल्डिंग एरिया की व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण बनाया है. अब यात्रियों को स्टेशन पहुंचते ही सीधे प्लेटफॉर्म पर जाने की अनुमति नहीं होगी. उन्हें पहले निर्धारित होल्डिंग एरिया में रुकना होगा. ट्रेन के आने का समय नजदीक होने पर ही यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर भेजा जाएगा.

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अजमेरी गेट की तरफ अनारक्षित श्रेणी के यात्रियों के लिए पिछले वर्ष स्थायी होल्डिंग एरिया बनाया गया था. इसी तरह आरक्षित श्रेणी के यात्रियों के लिए भी अलग होल्डिंग एरिया तैयार किया गया है.

इन स्थानों पर यात्रियों के सामान की जांच, टिकट काउंटर और ट्रेनों के समय की जानकारी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. यात्री अपनी ट्रेन के आने तक यहां इंतजार कर सकते हैं. इससे प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक रूप से यात्रियों की भीड़ जमा होने से रोकने में मदद मिलेगी.

आनंद विहार टर्मिनल पर भी स्थायी होल्डिंग एरिया

भीड़ प्रबंधन की यह व्यवस्था केवल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं है. आनंद विहार टर्मिनल पर भी नया स्थायी होल्डिंग एरिया बनाया गया है. इसका उद्देश्य यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर जाने से पहले व्यवस्थित तरीके से रोकना और स्टेशन परिसर में भीड़ को नियंत्रित करना है.

त्योहारों के दौरान दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है. ऐसे समय में प्लेटफॉर्म पर भीड़ का दबाव कम करना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती होता है. होल्डिंग एरिया के माध्यम से यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है.

बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष रास्ते

रेलवे ने वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं. स्टेशन परिसर, फुट ओवर ब्रिज और प्रवेश द्वारों पर बड़े दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए हैं, ताकि यात्रियों को अपने निर्धारित गेट और प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में परेशानी न हो.

व्हीलचेयर या विशेष सहायता की जरूरत वाले यात्रियों के लिए नजदीकी द्वारों पर रैंप और सुलभ रास्ते बनाए गए हैं. इससे दिव्यांगजनों और बुजुर्ग यात्रियों को भीड़ के बीच लंबी दूरी तय करने से राहत मिल सकती है.

मोबाइल टिकटिंग से कम होगी काउंटरों पर भीड़

अनारक्षित टिकट लेने के लिए काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करने के लिए मोबाइल टिकटिंग की व्यवस्था भी शुरू की गई है. इसके तहत रेलवे कर्मचारी हैंड हेल्ड डिवाइस लेकर यात्रियों के बीच पहुंच रहे हैं और मौके पर ही अनारक्षित टिकट जारी कर रहे हैं.

इस व्यवस्था से टिकट काउंटरों पर भीड़ का दबाव कम करने और यात्रियों को आसानी से टिकट उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. त्योहारों के दौरान जब कम समय में बड़ी संख्या में यात्रियों को यात्रा करनी होती है, तब यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है.

फरवरी 2025 की भगदड़ के बाद बढ़ी सतर्कता

फरवरी 2025 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की घटना के बाद से रेलवे त्योहारों और विशेष अवसरों पर भीड़ प्रबंधन को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है. दीपावली और छठ पूजा के दौरान यात्रियों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रवेश द्वारों का रंग के आधार पर निर्धारण, अलग निकास मार्ग, होल्डिंग एरिया और मोबाइल टिकटिंग जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं.

रेलवे की कोशिश है कि यात्रियों को स्टेशन परिसर में अनियंत्रित भीड़ का सामना न करना पड़े और प्लेटफॉर्म पर पहुंचने की प्रक्रिया व्यवस्थित रहे.

स्टेशन पहुंचने से पहले यात्री रखें इन बातों का ध्यान

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी टिकट श्रेणी और प्लेटफॉर्म नंबर पहले ही देख लेना चाहिए. स्लीपर और एसी टिकट वाले यात्री प्लेटफॉर्म 1 से 15 के लिए नीले गेट नंबर 8 और 11 तथा प्लेटफॉर्म 16 के लिए हरे गेट नंबर 10 का इस्तेमाल करें. सामान्य टिकट वाले यात्री पीले गेट नंबर 12 से प्रवेश करें.

यात्रियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि प्रवेश और निकास के रास्ते अलग हैं और प्लेटफॉर्म पर जाने से पहले होल्डिंग एरिया में इंतजार करना पड़ सकता है. ऐसे में ट्रेन के समय से पर्याप्त पहले स्टेशन पहुंचना और निर्धारित दिशा-सूचक बोर्ड का पालन करना जरूरी होगा. रेलवे की यह रंग आधारित व्यवस्था यात्रियों की सुविधा के साथ त्योहारों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है.

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