Sunday, March 3, 2024
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बसंत पंचमी 2024: इस दिन मनाया जाएगा विद्या और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्योत्सव

सनातन धर्म में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है, ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के आते ही ऋतु परिवर्तन होने लगता है। इस दिन से जहां ठंडक कम होने लगती है, वहीं ग्रीष्म ऋतु की आगमन शुरू हो जाता है। वहीं बसंत पंचमी के दिन विद्या और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है।

वहीं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहूर्त के तौर पर भी जाना जाता है, इस दिन नए कार्यों का शुभारंभ सर्वोत्तम माना जाता है इस दिन नये घर की नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, व्यापार शुरू करना, विवाह, अन्नप्राशन सहित अनेक मांगलिक कार्य भी किए जाते हैं। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती से प्रसन्न होकर वरदान दिया था कि बसंत पचंमी के दिन उनकी आराधना की जाएगी। तब से बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती के पूजन की परंपरा चली आ रही है।

बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त

सनातन पंचांग के अनुसार वर्ष 2024 में माघ मास की पंचमी तिथि मंगलवार 13 फरवरी को दोपहर 2:41 बजे से आरंभ होगी और पंचमी तिथि का समापन अगले दिन बुधवार 14 फरवरी को दोपहर 12:09 बजे होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार बसंत पंचमी बुधवार 14 फरवरी के दिन मनाई जाएगी। बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा मुहूर्त सुबह 7 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा, पूजा के लिए 5 घंटे 34 मिनट की अवधि मिलेगी।

बसंत पंचमी पूजा विधि

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इस दिन शिक्षण संस्थानों में माँ सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी उनकी पूजा की जाती है। इस दिन प्रात:काल स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण कर माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करें। फिर तिलक कर धूप-दीप जलाकर माँ को पीले फूल अर्पित करें। बसंत पंचमी के दिन अगर पूजा के दौरान सरस्वती स्त्रोत का पाठ किया जाए तो इससे व्यक्ति को अद्भूत परिणाम प्राप्त होते हैं। साथ ही इस दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी, भगवान विष्णु, वाद्य यंत्र और किताबें रखकर उनको भी धूप-दीप दिखाएं और विधि विधान से पूजा करें। पूजास्थल पर माँ लक्ष्मी और भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर श्रीसूक्त का पाठ करना बहुत लाभकारी माना जाता है।

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