Sunday, March 3, 2024
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श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने बताया है इस महीने को सबसे पवित्र, पुराणों में भी है बखान

सनातन पंचांग के अनुसार एक वर्ष में बारह मास होते हैं, सनातन पंचांग का आरंभ चैत्र मास से होता है और फाल्गुन मास सनातन पंचांग का अंतिम मास होता है। सनातन पंचांग में चैत्र, बैसाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन मास होते हैं।

सनातन पंचांग का नौवां मास मार्गशीर्ष अथवा अगहन मास है। आम बोलचाल में मार्गशीर्ष मास को अगहन मास कहा जाता है। सनातन मान्यता के अनुसार मार्गशीर्ष मास यानि अगहन मास को अत्यंत शुभ माना जाता है। सनातन पंचांग के अनुसार इस वर्ष आज मंगलवार 28 नवंबर से अगहन मास का आरंभ हो रहा है और बुधवार 26 दिसंबर 2023 को अगहन मास का समापन होगा। 

श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि सभी महीनों में मार्गशीर्ष सबसे पवित्र मास है। पुराणों में भी मार्गशीर्ष मास को ‘मासोनम मार्गशीर्षोहम्’ कहा गया है, अर्थात् मार्गशीर्ष से अधिक शुभ कोई मास नहीं है।

अगहन मास में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अत्यंत ही फलदायी मानी गई है। इस मास में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विधि विधान और मंत्रोच्चार के साथ की जाना चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, साथ ही घर में सुख शांति बनी रहती है। इसके साथ ही इस मास में मां लक्ष्मी एवं शंख की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सनातन धर्म में मार्गशीर्ष मास को दान-धर्म और भक्ति करने के लिए सबसे शुभ मास माना जाता है। साथ ही मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सनातन मान्यता के अनुसार अगहन मास में श्रीमद्भगवत गीता का पाठ करना भी शुभ माना गया है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को अमृत से सींचा गया था, इसलिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए।

मार्गशीर्ष मास यानि अगहन मास में आने वाली पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा कहा जाता हैं। इस बार मार्गशीर्ष पूर्णिमा मंगलवार 26 दिसंबर 2023 मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि मंगलवार 26 दिसंबर 2023 को प्रातः 5:46 बजे शुरू होगी और बुधवार 27 दिसंबर 2023 को प्रातः 6:02 बजे समाप्त होगी।

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