Sunday, February 25, 2024
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54वें आईएफएफआई में फ़ारसी भाषा की फ़िल्म ‘एंडलेस बॉर्डर्स’ ने जीता सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का गोल्डन पीकॉक पुरस्कार

54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्टता को मान्यता देते हुए आज अपने प्रतिष्ठित गोल्डन पीकॉक पुरस्कार का अनावरण किया गया। अंतर्राष्ट्रीय जूरी, जिसमें फिल्म जगत के दिग्गज शामिल हैं, ने आज गोवा के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में आयोजित एक शानदार समापन समारोह में पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की। गोवा में आयोजित महोत्सव में प्रतिष्ठित गोल्डन पीकॉक पुरस्कार के लिए 12 अंतर्राष्ट्रीय और 3 भारतीय फिल्मों सहित 15 असाधारण फिल्मों के बीच प्रतिस्पर्धा थी। पुरस्कार में 40 लाख रुपये की धनराशि, एक प्रमाणपत्र और एक गोल्डन पीकॉक मेडल शामिल हैं।

फ़ारसी भाषा की फ़िल्म एंडलेस बॉर्डर्स‘- सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म

सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए प्रतिष्ठित ‘गोल्डन पीकॉक’ अब्बास अमीनी द्वारा निर्देशित फारसी भाषा की फिल्‍म, ‘एंडलेस बॉर्डर्स’ को प्रदान किया गया। यह फिल्‍म अफगानिस्तान में तालिबान के उदय से उत्पन्न उथल-पुथल के बीच एक ईरानी शिक्षक की कठिन यात्रा की कहानी है। भावनाओं से ओत-प्रोत यह फिल्म पूर्वाग्रह, नैतिक दुविधाओं और निषिद्ध प्रेम की जटिलताओं को गहराई से चित्रित करती है। जूरी ने निर्देशक अब्बास अमीनी की कहानी कहने की साहसपूर्ण कला की सराहना करते हुए फिल्म की भौतिक और भावनात्मक सीमाओं को पार करने की क्षमता की प्रशंसा की।

एक उद्धरण में, जूरी ने कहा, “फिल्म इस बारे में है कि भौतिक सीमाएं कितनी जटिल हो सकती हैं। लेकिन आपके द्वारा अपने ऊपर थोपी गई भावनात्मक और नैतिक सीमाओं से अधिक जटिल कुछ भी नहीं हो सकता है। आख़िरकार, फ़िल्म महोत्सव भी सीमाओं को पार करने से जुड़े होते हैं और इस फिल्म के मामले में, निर्देशक ने अपनी स्वतंत्रता की कीमत पर राजनीतिक सीमाओं को पार किया है।

यह फिल्म अफगान सीमा के करीब ईरान के एक गरीब गांव में एक निर्वासित ईरानी शिक्षक अहमद की यात्रा का वर्णन करती है। तालिबान के बढ़ते प्रभाव ने अफगानिस्तान में जातीय और आदिवासी युद्धों की आग को फिर से भड़का दिया है। हजारा अफगान, जिन पर तालिबान का पहला खतरा मंडराता रहता है, अवैध रूप से ईरान में प्रवेश करते हैं। जब अहमद अफगानिस्तान के एक हजारा परिवार से परिचित होता है, तो उसे क्षेत्र में पूर्वाग्रह और हठधर्मिता का असली चेहरा दिखाई देता है। एक निषिद्ध प्रेम उसे आगे बढ़कर काम करने पर मजबूर करता है और उसे अपने जीवन में प्रेम और बहादुरी की कमी का पता चलता है।

बुल्गारिया के निर्देशक स्टीफन कोमांडेरेव को ‘ब्लागाज लेसन्स’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सिल्वर पीकॉक पुरस्कार मिला

बुल्गारिया के निर्देशक स्टीफन कोमांडेरेव ने धोखे के सामने नैतिक समझौते की एक दमदार पड़ताल करने वाली फिल्म ‘ब्लागाज लेसन्स’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का ‘सिल्वर पीकॉक’ पुरस्कार जीता। यह फिल्म ब्लागा नाम की एक विधवा पर केन्द्रित है, जिसका नैतिक संतुलन टेलीफोन घोटालेबाजों का शिकार बनने के बाद हिल गया है। यह फिल्म कम्युनिस्ट शासन के बाद के बुल्गारिया में आज के वरिष्ठ नागरिकों के नाजुक जीवन पर प्रकाश डालती है।

स्टीफन कोमांडेरेव एक महिला पात्र के माध्यम से एक शक्तिशाली एवं चौंकाने वाले सबक के बारे में बताते हैं। उस महिला पात्र को अपने लक्ष्यों को हासिल करने हेतु निर्णय लेना होता है और ऐसा करने के क्रम में वह अपने मूल्यों से समझौता करती है। जूरी के प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि इस फिल्म के कथानक को महान कलाकार सुश्री एली स्कोरचेवा ने अद्भुत ढंग से उकेरा है।

इस पुरस्कार में 15 लाख रुपये, एक प्रमाणपत्र और सिल्वर पीकॉक मेडल शामिल है।

फिल्म ब्लागा का एक दृश्य

समृद्ध अभिनय के लिए पौरिया रहीमी सैम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष) को सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया

अब्बास अमीनी द्वारा निर्देशित फारसी फिल्म ‘एंडलेस बॉर्डर्स’ में भूमिका के लिए अभिनेता पौरिया रहीमी सैम को सर्वसम्मति से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया है। जूरी ने इस अभिनेता को “शूटिंग की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने सहयोगियों, बच्चों एवं वयस्कों के साथ समृद्ध अभिनय और संवाद” करने के लिए चुना है।

जातीय तनावों एवं निषिद्ध प्रेम से जूझने वाले निर्वासित ईरानी शिक्षक अहमद के रूप में उनके बारीक अभिनय ने जूरी को गहराई से प्रभावित किया। जूरी ने शूटिंग की चुनौतीपूर्ण स्थितियों में इस समृद्ध एवं प्रामाणिक अभिनय की सराहना की।

‘एंडलेस बॉर्डर्स’ अफगान सीमा के निकट स्थित ईरान के एक गरीब गांव में एक निर्वासित ईरानी शिक्षक अहमद की जीवनयात्रा का वर्णन करता है। अफगानिस्तान में तालिबान के उदय ने जातीय और कबीलाई युद्धों की आग को फिर से भड़का दिया है। हजारा अफगान, जिन्हें तालिबान से सीधा खतरा है, अवैध रूप से ईरान में प्रवेश करते हैं। जब अहमद अफगानिस्तान के एक हजारा परिवार से परिचित होता है, तो उसे उस क्षेत्र में व्याप्त पूर्वाग्रह और हठधर्मिता का असली चेहरा दिखाई पड़ता है। एक निषिद्ध प्रेम उसे सक्रिय होने पर मजबूर करता है और उसे अपने जीवन में प्रेम एवं बहादुरी के अभाव से परिचित कराता है।

यह पुरस्कार आईएफएफआई में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल लगभग 15 फिल्मों के पुरुष अभिनेताओं में से अंतर्राष्ट्रीय जूरी द्वारा चुने गए सर्वश्रेष्ठ पुरुष अभिनेता को प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार में 10 लाख रुपये, एक प्रमाणपत्र और सिल्वर पीकॉक मेडल शामिल है। 

मेलानी थिएरी को पार्टी ऑफ फूल्स के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड

फ्रांसीसी अभिनेत्री मेलानी थिएरी को पार्टी ऑफ फूल्स के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के सिल्वर पीकॉक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। जूरी सदस्यों की ओर से प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि यह पुरस्कार “एक ऐसी अभिनेत्री को दिया गया है जिनकी अभिव्यक्ति का दायरा हमें उनके द्वारा निभाए गए चरित्र की उन्‍मादपूर्ण यात्रा में आने वाली आशा से लेकर निराशा तक की सभी भावनाओं को बेहद बारीकी से दर्शाता है।” उनके चित्रण ने उस चरित्र की उतार-चढ़ाव भरी यात्रा की आशा और निराशा की जटिल बुनावट को विविध भावनाओं के जरिए प्रदर्शित करते हुए अभिनय की बारीकी और गहराई से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आईएफएफआई में यह पुरस्कार अंतर्राष्ट्रीय जूरी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता की लगभग 15 फिल्मों की अभिनेत्रियों में से चुनी गई सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री को प्रदान किया जाता है। इसमें विजेता को 10 लाख रुपये, प्रमाणपत्र और सिल्वर पीकॉक मेडल से सम्‍मानित किया जाता है।

भारतीय फिल्मकार ऋषभ शेट्टी को कांतारा के लिए विशेष जूरी पुरस्कार

समीक्षकों द्वारा प्रशंसित भारतीय फिल्मकार ऋषभ शेट्टी को कांतारा के लिए विशेष जूरी पुरस्कार मिला है। जूरी के प्रशस्ति पत्र में भारतीय निर्देशक के लिए कहा गया है, ”बहुत ही महत्वपूर्ण कहानी को पेश करने की निर्देशक की क्षमता के लिए।” हालांकि यह फिल्म जंगल की अपनी ही संस्कृति के प्रेतों पर आधारित है, लेकिन वह संस्कृति और सामाजिक स्थिति के बावजूद दर्शकों तक पहुंच बनाती है।” शेट्टी की फिल्म एक काल्पनिक गांव में इंसानों और प्रकृति के बीच वैचारिक संघर्ष की पड़ताल करती है, जो परंपराओं और आधुनिकता के टकराव के बीच मार्मिक संदेश देती है।

ऋषभ शेट्टी कन्नड़ फिल्म अभिनेता और फिल्मकार हैं। समीक्षकों द्वारा प्रशंसित ब्लॉक बस्टर, ‘कांतारा’ के लिए विख्‍यात ऋषभ कई पुरस्कारों से सम्‍मानित किए जा चुके हैं, जिनमें 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सरकारी ही. प्रा. शाले, कासरगोडु, कोडुगे: रमन्ना राय’ के लिए सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का पुरस्कार भी शामिल है। उनके निर्देशन में बनी पहली और मनोरंजक फिल्‍म  ‘किरिक पार्टी’ है।

यह पुरस्कार किसी फिल्म को उसके किसी ऐसे पहलू के लिए दिया जाता है जिसे जूरी स्वीकार/पुरस्कार देना चाहती है या किसी व्यक्ति को किसी फिल्म में उसके कलात्मक योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार में एक सिल्वर पीकॉक मेडल, 15 लाख रुपये और एक प्रमाणपत्र दिया जाता है।

फिल्म ‘कांतारा’  का दृश्य

दक्षिण कन्नड़ के काल्पनिक गांव पर आधारित यह फिल्म मनुष्य और प्रकृति के बीच वैचारिक संघर्ष की पड़ताल करती है। जंगल में रहने वाली जनजाति के सह-अस्तित्व में एक वन अधिकारी द्वारा बाधा उत्पन्न की जाती है, जिसको लगता है कि जनजाति की कुछ प्रथाएं और अनुष्ठान प्रकृति मां के लिए ख़तरा हैं। वह उनके देवता के अस्तित्व पर सवाल उठाता है, जो उस धरती से जुड़ी परंपराओं और संस्कृति के साथ-साथ अहंकार की लड़ाई को जन्म देता है। नायक शिवा कंबाला महोत्सव का अव्‍वल आने वाला धावक है और वह शिकार, अवैध कटाई और वन के कीमती पेड़ों की बिक्री जारी रखने के कारण वन विभाग के लिए एक गंभीर खतरा है। वन विभाग जंगल में तोड़फोड़ करने के लिए शिवा और उसके साथियों से पूछताछ की। जनजाति  का मानना है कि यह जंगल उन्हें पूर्वकाल में एक राजा ने दान में दिया था। क्या शिव अपने अस्तित्व को समझकर गांव में शांति और सद्भाव बहाल कर पाएंगे, यही इस फिल्म का सार है।

रेगर आजाद काया को व्हेन द सीडलिंग्स ग्रो के लिए निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फीचर फिल्म का पुरस्कार

एक होनहार फिल्मकार रेगर आजाद काया को व्हेन द सीडलिंग्स ग्रो के लिए एक निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ डेब्यू फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला है। जूरी का कहना है कि यह फिल्म छोटी-छोटी घटनाओं के माध्यम से हमें एक पिता, बेटी और एक खोए हुए लड़के के जीवन के एक दिन की कहानी सफलतापूर्वक दिखलाती है। पात्रों के साथ-साथ यह एक देश और उसके दुखों की एक अंतरंग कहानी है। यह फिल्म एक पिता, बेटी और एक खोए हुए लड़के के जीवन के एक दिन का मार्मिक चित्रण है, जो देश के दुखों के बीच एक मर्मस्पर्शी कहानी को जटिल रूप से बुनती है।

अंतर्राष्ट्रीय जूरी द्वारा शॉर्टलिस्ट की गई फिल्मों के निर्देशकों में से चुने गए डेब्यू डायरेक्टर को दिए जाने वाले इस पुरस्कार का उद्देश्य विश्व सिनेमा में सबसे होनहार नई निर्देशकीय प्रतिभा को मान्यता देना और प्रोत्साहित करना है।

इस खंड में पांच अंतर्राष्ट्रीय और दो भारतीय फिल्मों ने प्रतिष्ठित सिल्वर पीकॉक मेडल, 10 लाख रुपये नकद पुरस्कार और एक प्रमाणपत्र के लिए प्रतिस्पर्धा की।

फिल्म व्हेन द सीडलिंग्स ग्रो का एक दृश्य

फिल्म निर्माण में उत्कृष्टता को मान्यता देते हुए, गोल्डन पीकॉक पुरस्कार दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्म सम्मानों में से एक है। इस वर्ष की जूरी में जूरी के अध्यक्ष भारतीय फिल्म निर्माता शेखर कपूर, स्पेनिश सिनेमैटोग्राफर जोस लुइस अल्काइन, फ्रांसीसी फिल्म निर्माता जेरोम पैलार्ड और कैथरीन डुसार्ट और ऑस्ट्रेलियाई फिल्म निर्माता हेलेन लीक जैसे सिनेमा उद्योग के दिग्गज शामिल थे।

प्रतिस्पर्धी फिल्मों में वुमन ऑफ (मूल शीर्षक- कोबीटा जेड), द अदर विडो (मूल शीर्षक- पिलेगेश), द पार्टी ऑफ फूल्स (मूल शीर्षक- कैप्टिव्स), मेजर्स ऑफ मेन (मूल शीर्षक- डेर वर्मेसीन मेन्श), लुबोहॉफमैन फेयरी टेल्स (मूल शीर्षक: स्काजकी गोफमाना), एंडलेस बॉर्डर्स (मूल शीर्षक: मरझाये बी पायन), डाई बिफोर डेथ (मूल शीर्षक: उमरी प्रीजे स्मृति), बोस्नियन पॉट (मूल शीर्षक: बोसान्स्की लोनाक), ब्लागा’ज लेसंस (मूल शीर्षक: यूरोटसाइट ना ब्लागा), असोग, एंड्रागोजी (मूल शीर्षक: बुडी पेकेर्टी) और तीन भारतीय फिल्में कंतारासना और मिरबीन शामिल हैं।

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