उत्पन्ना एकादशी का व्रत प्रदान करता है मनोवांछित फल

एकादशी की तिथि माह में दो बार पड़ती है, पहली कृष्ण पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में।

इस सप्ताह शक संवत 1942 विक्रम संवत 2077 के मार्गशीर्ष अर्थात अगहन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी से लेकर चतुर्दशी तक के प्रमुख व्रत और त्योहारों के अंतर्गत सोमवार 7 दिसंबर को काल भैरव अष्टमी है। शिव जी के अवतार, काल भैरव की इस दिन पूजा की जाती है। काल भैरव समस्त प्रकार के दुख एवं तकलीफों को दूर करते हैं।

पं अनिल पाण्डेय ने बताया कि शुक्रवार 11 तारीख को उत्पन्ना एकादशी है। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। एकादशी की तिथि माह में दो बार पड़ती है, पहली कृष्ण पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। कुछ भक्तजन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए इस दिन व्रत भी करते हैं।

12 दिसंबर को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है।13 तारीख को शिव चतुर्दशी का व्रत है।

वहीं 10 दिसंबर को भगवान महावीर का दीक्षा कल्याणक है। गृह त्याग कर भगवान महावीर इसी दिन मुनि धर्म  की दीक्षा ली थी। इसलिए इसको भगवान महावीर का दीक्षा कल्याणक कहते हैं। यह मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन मनाई जाती है।