कुछ लोग एमएसपी लेकर कर रहे हैं देश के किसानों को गुमराह: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसंग के जरिये बिहार में 14,000 करोड़ रुपये की नौ राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास किया. साथ ही प्रदेश के 45,945 गांवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवा से जोडऩे के लिए घर तक फाइबर योजना की शुरुआत की.

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज बिहार की विकास यात्रा का एक और अहम दिन है. अब से कुछ देर पहले बिहार में कनेक्टिविटी को बढ़ानेवाली नौ परियोजनाओं का शिलान्यास किया है. इन परियोजनाओं के लिए बिहार के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ.

उन्होंने कहा कि देश के गांवों में इंटरनेट उपयोग करनेवालों की संख्या शहरों से ज्यादा हो जायेगी, ये कुछ वर्षों तक सोचना मुश्किल था. किसान, गांव के युवा, महिलाएं आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे. इस पर भी लोग सवाल उठाते थे, लेकिन अब सारी स्थितियां बदल गयी है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंटरनेट का इस्तेमाल बढऩे के साथ-साथ अब ये भी जरूरी है कि देश के गांवों में अच्छी क्वॉलिटी, तेज रफ्तार वाला इंटरनेट भी हो. सरकार के प्रयासों की वजह से देश की करीब डेढ़ लाख पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर पहले ही पहुंच चुका है.

उन्होंने कहा कि आज देश में मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी पर बल दिया जा रहा है. अब हाईवे इस तरह बन रहे हैं कि वो रेल रूट को, एयर रूट को सपोर्ट करें. रेल रूट इस तरह बन रहे हैं कि वो पोर्ट से इंटर-कनेक्टेड हों. यानी, सोच ये है कि यातायात का एक साधन, दूसरे साधन को सपोर्ट करे. इससे लॉजिस्टिक को लेकर भारत में जो समस्याएं रही हैं, वो भी बहुत हद तक दूर हो जायेंगी.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की संसद ने कल देश के किसानों को नये अधिकार देनेवाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है. मैं देश के लोगों को, देश के किसानों को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं. ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे. इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गये थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे. आखिर ये कब तक चलता रहता. इसलिए, इस व्यवस्था में बदलाव करना आवश्यक था और ये बदलाव हमारी सरकार ने करके दिखाया है.

नये कृषि सुधारों ने देश के हर किसान को ये आजादी दे दी है कि वो किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल, अपने फल-सब्जियां अपनी शर्तों बेच सकता है. किसानों को मिली इस आजादी के कई लाभ दिखाई देने शुरू भी हो गये हैं.

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दालें बहुत होती हैं. इन राज्यों में पिछले साल की तुलना में 15 से 25 प्रतिशत तक ज्यादा दाम सीधे किसानों को मिले हैं. दाल मिलों ने वहां भी सीधे किसानों से खरीद की है, सीधे उन्हें ही भुगतान किया है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब देश अंदाजा लगा सकता है कि अचानक कुछ लोगों को जो दिक्कत होनी शुरू हुई है, वो क्यों हो रही है. मैं यहां स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं हैं. कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा. बल्कि ये हमारी ही एनडीए सरकार है, जिसने देश की कृषि मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर काम किया है.

उन्होंने कहा कि कृषि मंडियों के कार्यालयों को ठीक करने के लिए, वहां का कंप्यूटराइजेशन कराने के लिए, पिछले 5-6 साल से देश में बहुत बड़ा अभियान चल रहा है. इसलिए जो ये कहता है कि नये कृषि सुधारों के बाद कृषि मंडियां समाप्त हो जायेंगी, तो वो किसानों से सरासर झूठ बोल रहा है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये भी जगजाहिर रहा है कि कृषि व्यापार करनेवाले हमारे साथियों के सामने एसेन्शियल कमोडिटी एक्ट के कुछ प्रावधान, हमेशा आड़े आते रहे हैं. बदलते हुए समय में इसमें भी बदलाव किया है. दालें, आलू, खाद्य तेल, प्याज जैसी चीजें अब इस एक्ट के दायरे से बाहर कर दी गयी हैं. अब देश के किसान, बड़े-बड़े स्टोरहाउस में, कोल्ड स्टोरेज में इनका आसानी से भंडारण कर पायेंगे. जब भंडारण से जुड़ी कानूनी दिक्कतें दूर होंगी, तो हमारे देश में कोल्ड स्टोरेज का भी नेटवर्क और विकसित होगा, उसका और विस्तार होगा.

मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में इन ऐतिहासिक बदलावों के बाद, इतने बड़े व्यवस्था परिवर्तन के बाद कुछ लोगों को अपने हाथ से नियंत्रण जाता हुआ दिखाई दे रहा है. इसलिए अब ये लोग एमएसपी पर किसानों को गुमराह करने में जुटे हैं. ये वही लोग हैं, जो बरसों तक एमएसपी पर स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को अपने पैरों की नीचे दबाकर बैठे रहे.