जिंदगी- अन्नपूर्णा देवांगन

सड़कों पर निकली है
सड़कों सी जिंदगी
कहीं पर दुख के मोड़
तो कहीं पर सुख का निचोड़
कहीं पर राहें आसान
तो कहीं पर मंजिल अनजान
कभी बीत जाती है सरलता से
कभी हो जाती है बोझ जिंदगी
जाने किस छोर पर
ले जाती ये जिंदगी
कभी मिल जाते हैं मुसाफिर
बन हमसफर हमारा
कट जाते हैं यूं रास्तें
सफर हो जाता है सुहाना
कल कभी आता नहीं
आज कभी जाता नहीं
इसलिए वर्तमान में
जीती है जिंदगी
जिंदगी उस जिंदादिली
का नाम है दोस्तों
जिसका न कोई अपना है
न कोई पराया है
गम में भी खुशी
और खुशी में भी
गम का साया है
यही मानव जीवन की
तो एक सच्चाई है
निरंतर चलते जाना
हां बस चलते जाना है

-अन्नपूर्णा जवाहर देवांगन
महासमुंद, छत्तीसगढ़