ख्वाहिश- शिवम मिश्रा

मैनें कभी कुछ नहीं माँगा तुमसे लेकिन
एक ख्वाहिश हमेशा से रही है
एक तमन्ना, जब मेरा आखरी वक्त हो
कुछ पल के लिये ही सही
तुम मेरे साथ रहो, मेरे पास रहो

तुम आओगी तो, कुछ मत कहना
कोई शिकायत मत करना
कुछ मत पूछना मुझसे
बस चुपचाप मेरे सिसकती हुई
सांसों की आवाजें सुनना
मैं एकटक-टकी लगाये देखूंगा तुम्हें
तुम मुझे देखना

जब लड़खड़ाकर गिर जाऊं मैं तो
तुम अपनी गोद में सर रखने की जगह दे देना
मेरे सीने में हाथ रखकर तुम
इन धड़कनों को चुप रहने को कहना
जब मेरी सांसें थम जायें
तुम मेरी पलकें बंद कर देना
फिर मेरे माथे को चूमना,
मेरी दोनों पलकों को
मेरे होंठों को चूमकर तुम
मुझे अपने सीने से लगा लेना
तुम मुझे विदा करके
मेरी रूह को खुद में मिल जाने देना

हाँ बस यही ख्वाहिश है मेरी

-शिवम मिश्रा
मुंबई