झरते पत्तों की वेदना- डॉ मीरा रामनिवास

डाल से विछुड़ कर, पत्ता बहुत रोया था
उसने अपना घर और ठिकाना खोया था
शाख पर लगे पत्ते, उसके अपने ही थे
शाख पर बैठे पंछी, उसके साथी ही थे
घर से दूर जाकर भला कौन दुखी न होगा
अपनों से बिछड़ कर भला कौन सुखी होगा
शाख से जैसे ही कोई पत्ता गिरता है
पास वाला पत्ता भय से कंपकंपाता है
न जाने अब किसकी बारी है
ड़ाल से बिछड़ने की तैयारी है
शाख से गिर कर, पत्ते दुखी हो जाते हैं
शाख पर बिताये, अच्छे दिन याद आते हैं
शाख पर, हवा संग सरसराते थे
एक दूजे को, खूब धकियाते थे
खूब हंसते थे, खिलखिलाते थे
गिलहरी संग, लुकाछुपी खेलते थे
तोता मैना संग खूब बतियाते थे
बरसात में भीगते नहाते थे
गिरते ही जीवन रुक गया
जीवन से बसंत चुक गया
धरा पर गुमसुम पड़े, पत्तों की वेदना,
कोई नहीं जान पाता है
हर व्यक्ति, आते जाते
रौंद कर, चला जाता है
धरा पर पड़े पत्ते
हवा संग, यहाँ वहाँ बिखर जाते हैं
अपना दर्द दिल में लिए, दफ़न हो जाते हैं
पेड़ पर नये पत्तों के साथ
फिर से जीवन शुरू हो जाता है
सृष्टि का क्रम हर बार
यूँ ही चलता रहता है

-डॉ मीरा रामनिवास

परिचय-
डॉ मीरा रामनिवास वर्मा
पूर्व भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी
जन्म स्थान- भरतपुर, राजस्थान
शिक्षण- एमए, पीएचडी संस्कृत, साहित्य
साहित्य लेखन- काव्य,कथा,बाल साहित्य संस्मरण, यात्रावृतांत, आदि
प्रकाशन-
काव्य संग्रह- अंकुर, एहसास की धूप, नया सवेरा
कथा संग्रह- स्मृतियों के दायरे,अक्षरा और अन्य कहानियां
संपादन- खाकी मन की संवेदनाएं, गुजरात पुलिस के अधिकारियों की रचनाओं का संग्रह
सम्मान- कहानी के लिए द्वितीय पुरुस्कार द्वारा हिंदी साहित्य परिषद अहमदाबाद, साहित्यालोक संस्था द्वारा साहित्य लेखन के लिए सारस्वत सम्मान, लघु कथा के लिए प्रथम पुरस्कार, द्वारा सहित्यालोक संस्था, सौराष्ट्र संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा प्रशासन साहित्य भारती सम्मान, आधारशिला अंतरराष्ट्रीय हिंदी मिशन द्वारा अंतरराष्ट्रीय हिंदी गौरव सम्मान।
गतिविधियाँ- आकाशवाणी पर कविता पठन, हिंदी पत्रिकाओं में कहानी कविता प्रकाशन, प्रतिलिपि वेबसाइट पर कहानी कविता प्रकाशन महिला सशक्तिकरण महिला कलम से कवियित्री समारोह का आयोजन।
रूचियां- पठन, लेखन, संगीत, बागवानी, ट्रैकिंग, यात्राएँ।
सम्पर्क सूत्र- आश्रय-474, सेक्टर-1, गांधीनगर, गुजरात
मोबाइल नम्बर- 9978405694