दीर्घतपा नाम की स्त्री
निकल पड़ी प्रेयस के देश
की तरफ
समस्त जगत को भग्न वस्तु की तरह त्याग कर

उलझा हुआ मानचित्र
प्रिय की खोज का संकल्प
विरह का ज्वर
और पछुवाँ बयारों की शीत
बनते उसके सहचर

नतशिर पड़ी रहती दीर्घतपा
उन्मार्जन करती रहती अपने घावों का
तीर्थरूप हो चुकी
उस कल्लोलिनी के तट पर
जहां कभी प्रियतम ने स्नान किया था

इस यात्रा में यदा कदा जब
हिमालय की शिलाओं पर
प्रेयस के चरण चिन्ह मिल जाते
तो वो प्रदक्षिणा करती रहती
असंख्य पहर

समीपता की लालसा में ध्वस्त हृदय
जब दीर्घनाद करता तो
पर्वतों के वक्षस्थल पर
कंदराएँ प्रकट हो जातीं
निःश्वासें टकरातीं जब चीड़ के पेड़ों से तो
प्रकट हुई वनाग्नि
उसकी विरहाग्नि के समक्ष नगण्य होती

जब नदी के जल में वो देखती स्वयं का प्रतिबिंब
और मुक्त करती बालों से
उजास पुष्प
तो चंद्र रास्ता दिखाने आ जाता

प्रियतम की तरफ की यात्रा
प्रकृति का उत्सव है

अनुजीत ‘इकबाल’
भूतपूर्व अंग्रेजी प्रवक्ता

परिचय
नाम- अनुजीत ‘इकबाल’
पता- मकान नम्बर 4, राम रहीम एस्टेट, मलाक रेलवे क्रोसिंग के पास, नीलमथा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश- 226002
ईमेल पता- [email protected] gmail.com

प्रकाशित पुस्तकें
● Radical English for Nurses
● Applied Grammar and Composition
● The Inner Shrine {Novel}
● Psychology and Psychiatry for Nurses

सम्मान
● 2018 -लखनऊ में 16 वें पुस्तक मेले द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की अंग्रेजी कविता लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान एवं सम्मान।
● 2019- लखनऊ में 17वें पुस्तक मेले द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की हिंदी कविता लेखन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान एवं सम्मान
● 2020- राष्ट्रीय पुस्तक मेले में अंग्रेजी कविता में प्रथम स्थान

● विभिन्न संस्थाओं द्वारा लेखन, पेंटिंग और योग के लिए 85 से अधिक सम्मान-पत्र

प्रकाशन
देश विदेश की विभिन्न पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में कविताओं का प्रकाशन, जिनमें दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की “स्त्रवंति”, भारतीय भाषा परिषद की “वागर्थ”, गर्भनाल पत्रिका, जानकीपुल, पोषम पा, विभोम स्वर, नवभारत टाईम्स, हम हिंदुस्तानी अमेरिका, हिंदी अब्रॉड कैनेडा, साहित्य कुंज कैनेडा इत्यादि

शौक
●अंग्रेजी एवं हिंदी की कविता, कहानियां लिखना
● ऐक्रेलिक पेंटिंग बनाना {आध्यात्म पर}
● शास्त्रीय संगीत सुनना
● अष्टांग योग