हस्ती मिटा दे कोई- निशांत खुरपाल

इतने भी गए गुज़रे नहीं कि
हमारी हस्ती मिटा दे कोई
अगर दम है तो आओ हम खड़े हैं,
हमें आकर मिटा दे कोई

कब्र में लेट गया हूँ कि
अब देखूँगा ना मुड़कर जहान को
देख भी सकता हूँ मुड़कर,
पर पहले उसकी तस्वीर दिखा दे कोई

अपनी और ज़माने की तो,
बहुत सुन चुका अब तक
तमन्ना उसकी है, सुना सको तो
उसकी आवाज़ सुना दे कोई

कि जब तक ना पी लूँ एक जाम,
मेरी आँखें नहीं खुलती,
शराब न सही, उसके हाथों से
ज़हर का प्याला ही पिला दे कोई,

लड़कियाँ तो हर बार,
लगती रही हैं दाँव पर ‘खुरपाल’,
मैं भी इंतज़ार में हूँ कि
इस बार मुझे भी दाँव पर लगा दे कोई

-निशांत खुरपाल ‘काबिल’
अध्यापक, कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल, पठानकोट
संपर्क- 7696067140
ईमेल- [email protected]