महामारी, उद्योग, मजदूर व मजदूरी- वीरेन्द्र तोमर

दुनिया के 185 देशों में लगभग 20 लाख की आबादी कोरोना से प्रभावित चुकी है व लाखों लोग इसकी भेंट चढ गये हैं।
LOCKDOWN की वजह से जहाँ की तहां जनता फंसी हुई है। यह लाईलाज साबित होने की वजह से लोगों में दहशत व भय पैदा कर चुकी है।
मात्र भारत में लगभग दस हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 300 से ज्यादा लोग काल की गाल में समा चुके हैं।
भारत में 40 करोड के लगभग ऐसे असंगठित क्षेत्र के लोग ज़िनके पास आधार कार्ड के सिवा कुछ भी नहीं और आज ये लोग रोजगार से वंचित हो चुके हैं। इसमें अधिकांशतः मजदूर असंगठित क्षेत्र से शामिल हैं।
हमारे प्रधानमंत्री जी की अपील कि किसी भी श्रमिक को काम से न निकाला जाये, परंतु फिर भी अधिकतर मजदूरों के रोजगार छिन से गये हैं और की गयी मजदूरी का पैसा भी ठीक से नहीं दिया गया है।
एक कारण तो सरकार की द्वारा सीधे उनके आधार कार्ड राहत का न मिलना तथा दी गई राहत से वंचित होना क्योंकि बैंक खाता व पुएफ कुछ का अभी भी नहीं और ज़िनका खाता है भी तो मूल प्रदेश से बाहर का है, यानी कि मूल निवासी बिहार का पर खाता पंजाब में खुलवाया जहाँ बह रोजगार करता है और दूसरी बजह 21 दिन के बाद पुन: की गई तालाबन्दी से चरमराई उनकी रोजमर्रा की जीवन शैली, जैसे कि मकान भाडा, रोजगार का छिनना, नशे की व्याकुलता, कोरोना के खिलाफ कोई दवा का न होना।
इसकी तीसरी वजह है कि कोरोना के खिलाफ छेड़ी गयी जंगमें इन मज़दूरों का मानसिक रुप से तैयार न होना तथा अपने घर-परिवार से अलग होना ही इनके पलायन का मूल कारण है। अभी बीते दिनो सूरत गुजरात में हुई घटना , देश भर के सभी शहरों से मजदूरौं का पैदल ही निज गाँवो को पलायन को भूलाया नहीं जा सकता।
नशा से पूर्ण जगत का दूर होना एक अच्छी व नेक सोच है सारकारों की किंतु जो नशे के आदी हो चुके हैं उनको इस् संकट की घडी में बीडी, तंबाकू, सिगरेट, मावा तथा पान नसीब नहीं हो रहे और चोरी छीपे यदि कही मिल भी जाता है तो 25 से 30 गुना मुल्य कीमत से ज्यादा में बेचा जा रहा है।
अब समय आ गया है कि सरकार के द्वारा उठाये जा रहे सभी कदम इस् महामारी के खिलाफ आम जन्मानस को विषेश भरोसे में लेकर तथा उनके हितों को ध्यान में रखकर लेने होंगे ताकि COVID-19 के खिलाफ जंग जीती जा सके और देश भी चलता रहे।

-वीरेन्द्र तोमर