हम चलें गांव की ओर- वीरेंद्र तोमर

भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है, भारत के अंदर अनेक प्रकार के खनिज पदार्थ उपलब्ध हैं। भारत देश की आत्मा गांवों में बसती है। भारत के विकास का रास्ता गांव से ही होकर शहर तथा दुनिया की ओर जाता है।
वर्तमान में कोरोना बजैसी घातक बीमारी पूरी दुनिया को अपने आगोश में लपेट  चुकी है। यह महामारी चेचक के तरह ही पूरी दुनिया में फैली हुई है और इसका इलाज दो-चार 5 सालों तक भी संभव दिखाई नहीं दे रहा है, अर्थात अब हमें नई संभावनाओं का तलाश करना होगा। जिससे कि इस महामारी से छुटकारा भी मिले और साथ ही साथ हम रोजगार के नए अवसरों का सृजन कर सकें। इस महामारी के कारण उद्योग जगत में ताले लग गए हैं और हमारा मजदूर गांव की ओर पलायन कर रहा है।
हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा राष्ट्र को किए गए संबोधन में जो कहा गया है कि यह महामारी एक नई संभावनाओं को लेकर आई है इसे नकारा नहीं जा सकता है। महामारी की वजह से फैक्ट्रियों में की गई तालाबंदी तथा मजदूरों को उस तालाबंदी के समय का वेतन न मिलना मजदूरों के विश्वास को खत्म कर चुका है और मजदूर गांव की ओर पलायन कर रहा है, जिससे रोकना एक असंभव साबित हो रहा है।
भारत की सुंदरता भारत के गांव में बसती है। भारत गांव का देश है, यह विश्व विदित है। भारत के रीढ़ की हड्डी भारत की कृषि व्यवस्था पर ही निर्भर है, बीते दिनों में देखा गया है कि गांव से शहरों की तरफ लोगों का पलायन हो रहा था, किंतु इस महामारी के बाद अब शहरों से गांव की ओर लोगों का मजदूरों का पलायन हो रहा है अब हमें जरूरत है कि विकास के नए आयाम खोले जाएं।
गांव के किसान नौजवान व मजदूर सरकार के द्वारा दिए गए अनुदान पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं और यदि उनको संसाधन मुहैया करा दिया जाए तो निश्चित ही रोजगार के नए अवसर पैदा हो जाएंगे। इन संसाधनों में बिजली, पानी, सड़क, चिकित्सा तथा शिक्षा ही मुख्य बिंदु है। जिन पर सरकार को युद्ध स्तर पर काम करना चाहिए का की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था को शीघ्र ही वापस पटरी पर लाया जा सके। श्रमिकों के हितकारी नियम में किए गए संशोधन तथा परिवर्तन से भी मजदूर विचलित हुआ है और वह अब शहर की ओर नहीं लौटना चाहता है यहां तक सोशल मीडिया के जरिए सुना गया है कि “नून रोटी खाएंगे, नौकरी पर लौट के नहीं जाएंगे”।
गांव में मजदूर किसान तथा नौजवान मिलकर खेती को एक नया व्यवसाय का रूप दे सकता है। जिसमें रेडी कैश की फसलें, बागवानी वृक्षारोपण तथा हरी सब्जी के उत्पादन पर यदि ध्यान केंद्रित किया जाए तथा खेती को लघु उद्योग का दर्जा दिया जाए। जिससे कि तेल, मसाले, आलू के पापड़, चिप्स, मुरब्बा, अचार, सूत कातना, सिलाई-कढ़ाई के अलावा मत्स्य पालन, पशु पालन ,चर्म उद्योग तथा लकड़ी के अनेक कारखाने गांव व क्षेत्रों में स्थापित किए जा सकते हैं और इनके द्वारा निर्मित सामान हम विश्व की बाजार में बहुत ही आसानी से अच्छे दामों में बेचकर धन अर्जित कर सकते हैं।
हमारी सरकार को बड़े उद्योगों से ध्यान हटाकर कुटीर उद्योगों पर एमएसएमई के द्वारा बिना किसी गारंटी के लोगों को धन मुहैया कराए तथा छोटे छोटे उद्योगों को प्राथमिकता दे। जैसा कि हमारे मोदी जी कहते हैं कि लोकल माल को ग्लोबल बनाना हमारी प्राथमिकता रहेगी। इस महामारी  के दौर में लोकल प्रोडक्ट नहीं लोगों को बचा के रखा है।
नरेगा और मनरेगा से सरकार को ध्यान हटाना चाहिए क्योंकि इसमें मात्र प्रधानों तथा अधिकारियों का  लाभ होता है किंतु क्षेत्र का विकास बिल्कुल भी नहीं हो पा रहा है। इससे यह साबित होता है कि यह धन का दुरुपयोग हो रहा है। यह बात प्रदेश की सरकार तथा केंद्र की सरकार तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती है और हमारी सरकारें यहमहसूस  करती हैं कि जो इसकी में गांव के लिए लागू की जा रही है, उनका निश्चित ही गांव के लोगों को लाभ मिल रहा होगा। किंतु धरातल की सच्चाई कुछ और ही बयां करती है।
हमारे ख्यात की महान प्रधानमंत्री मोदी जी की ईमानदारी पर पूरी दुनिया नाज करती है और इसे कोई भी शक के दायरे में नहीं देख सकता है, हमें आशा है कि प्रदेश तथा देश के कुशल नेतृत्व  के कारण आज देश एक विकास की नई कीर्तिमान स्थापित कर सकता है जो मोदी जी का  परचम पूरी दुनिया में लहरा सकता है। भारत एक उन्नतशील नहीं बल्कि उन्नत देशों की श्रेणी में  स्थान बना सकता है।
मोदी जी के द्वारा 20 लाख करोड़ का घोषित किया गया अनुदान वास्तविक में एक आजादी के बाद बहुत बड़ा अनुदान है, देश के लिए। इस अनुदान से देश का विकास एक नई ऊंचाइयों को छू सकता है इसके लिए एक ठोस क्रियान्वयन का होना आवश्यक है।
हमें एमएसएम  के रजिस्टर्ड छोटी मोटी सारी कंपनियों को बिना किसी गारंटी के लोन दे कर के उन्हें छोटे-छोटे उद्योग लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। जिससे कुटीर उद्योगों काजल पूरे देश में फैल जाएगा और हर गांव वह हर शहर में विकास की गंगा बहने लगेगी!  आओ अब   “हम चलें गांव की ओर”।
कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लगाया गया लॉक डाउन को अब धीरे से नरमी बरतते हुए भारत के सड़क तथा रेल मार्गों को खोल देना चाहिए साथ ही सख्त हिदायत भी कोरोनावायरस से बचने के लिए जारी की जानी चाहिए,जिससे कि लोग कोरोनावायरस से संघर्ष करने के साथ-साथ अपने विकास की गति को बढ़ा सकें।
लोगों का विभिन्न प्रदेशों के बीच में आवागमन होगा इसे रोका नहीं जा सकता है और यह व्यवसाय के लिए भी हितकारी है। अब समय आ गया है कि सरकार  तालाबंदी पर ढील दे तथा देश में घरों पर बैठे गरीब लोग बाहर निकल कर अपने रोजगार का अवसर तलाश सकें साथ ही कोरोनावायरस जैसी महामारी से भी संघर्ष करें तभी देश खुशहाल होगा।

-वीरेंद्र तोमर