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माँ वसुंधरा: प्रार्थना राय

माँ वसुंधराशान्तिप्रिय, हरित वसनाब्रह्मांड की तुम हो ज्योत्सना  प्रकृति स्वरुपाहे रत्नगर्भालालिमा युक्त है तेरी कायाओज से तुम...

अपनी धुन तू खुद ही चुन: प्रियंका गुप्ता

कभी इस की सुन,कभी उस की सुनदुनिया कुआँ जंजाल का है,बात–बात पर सब की सुनजो आगे बोले उसकी सुन,जो पाछे बोले...

वो जब हँसता था: रूची शाही

वो जब हँसता था तोमुझको उसके दाँत बहुत अच्छे लगते थेऔर फिर मुझे बशीर बद्र कावो शेर याद आता थाउजले उजले...

मेरे अल्फाजों में: रूची शाही

बड़ी मुश्किलों से दिल के जख्म सी रहे हैंतुमसे जुदा हैं फिर भी तुमको ही जी रहे हैंमर भी गए तो...

प्रेम का रंग: अतुल पाठक

कोई अपना शरीर से दूर हो सकता हैपर आत्मा से नहींआत्मा से आत्मा का मिलन ही प्रेम होता हैऔर प्रेम कभी...

उम्मीद का पौधा: प्रार्थना राय

हमें खौफ़नहीं रुसवाई काहम जिन्दा हैं सच की बदौलतइक उम्मीद का पौधा लगा जायेंगे  ज़मी परअपना नाम...

गर माँ न होती: अतुल पाठक

ये ज़मीं आसमां मुझे छोटे लगतेतेरे किरदार सा नहीं बड़ा कोई माँ जहां तू होती है,वहां खुशियां...

चाँदनी की आँखों में: प्रार्थना राय

सखी, श्याम हमसे रुठ गये दिन, दुपहरिया, साँझ मनाऊँसगरी रतिया जाग बिताऊँ तुम रुठे हो मैं स्वयं से...

निज़ाम जरा बताओ: प्रियंका गुप्ता

ये हँसते खेलते चेहरे देखो कैसे,धरती में हैं गढ़ गयेये चीखती सांसें देखो कैसेमौत की शांति में हैं बदल गयेरोते-बिलखते परिवार...

मन की चौखट पर: प्रार्थना राय

डाली डाली कुसुम खिले, बाहों की लहरें तुम्हें पुकारेभोर की पहली किरण संग, सूरज की लाली तुम्हें बुलायेगुलाबी देह मरुस्थल हुई,...

नमन भास्कर देव: गौरीशंकर वैश्य

सूर्य देव तुमको नमन, कृपादृष्टिमय धूप। उर्वरता, जीवन, सृजन, हरीतिमा नव रूप।। सूर्य देव की कृपा से, पृथ्वी, चंद्र प्रसन्न। देते शुभ आशीष में, कंद-मूल, जल अन्न।। सूर्य...

लेकर आई लोहड़ी फिर से नूतन हर्ष: पूजा

लेकर आई लोहड़ी, फिर से नूतन हर्ष करते हैं हम सब कामना, मंगलमय हो नववर्ष।। शीतल-शीतल रात है,...

सिवाय मेरे: रूची शाही

तुम्हारी पसंद की चीज़ों सेअपना कमरा तो सजा लिया मैंनेपर कमरे में तुम्हारी अनुपस्थितिबहुत आहत करती है मुझे

हिंदी: गौरीशंकर वैश्य

जन-गण-मन का अनवरत घोषजय जय भारत, जय जय हिंदी व्यापक, सुग्राह्य, अति सहज सुगमभूमंडल की प्रिय जन...

आगे बढ़ा हुआ हाथ: जसवीर त्यागी

कभी-कभीसड़क पार करने से हिचकते हैं हमखड़े रहते हैंएक ही जगह पर देर तकमन की उलझन फैलती जाती है

भूख की तड़प: गरिमा गौतम

भूख से तड़पते देखाजब अपने जायों कोधधकी ज्वाला अंतस मेंपर दाना नहीं खिलाने को कंकाल सा तन...

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