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फ़रेब, सब्र, तमन्ना, निबाह, मायूसी- रामरज फ़ौजदार

ज़ीस्त ने और भी गुलकरियाँ करना है अभी देखते जाओ नये दर्द उभरना है अभी फ़रेब, सब्र, तमन्ना, निबाह, मायूसी ज़िन्दगी है तो कई रंग से मरना...

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