Home Tags पोएट्री

Tag: पोएट्री

हर नजर में बेबसी: समीर द्विवेदी

रौशनी घायल पड़ी है आजकल हर नजर में बेबसी है आजकल नाखुदा तो साफ बच जाता है दोस्त सिर्फ कश्ती डूबती है आजकल स्वार्थ के कदमों तले इन्सानियत राह...

चार कविताएं: अमित कुमार मल्ल

कभी बेवजह भी मिला करोकभी यूँ भी कुछ कहा करोसाथ न देने के लिये हीकभी बेसबब भी चला करो

सुनो कुछ वक्त दे दो ना: रूची शाही

अभी भी कितने ही गम मेरे सिरहाने पे बैठे हैंअभी ही तुम नए सपने सजाने को कहते होअभी भी काँपते है...

आसां नहीं है राहे वफ़ा: समीर द्विवेदी

माना कि साथ चल न सका कारवां केलेकिन ये मत समझ की मेरे पाँव थक गये दिलकश...

राह चुनो मानवता की: प्रार्थना राय

जब तक चुनौतियों को नहीं स्वीकारोगेतब तक युग निर्माण नहीं कर सकोगेमानवता की मान्यता को प्रथम संज्ञा देकरअत्याचारी बिन्दुओं के अजगर...

ट्यूब लाइट: जसवीर त्यागी

घर मेंएक बहुत पुरानी ट्यूब लाइट है साल में दो-तीन बारलप-लप, झप-झप करती हुईबहुत देर से जलती...

प्रेमिकाएं: रूची शाही

प्रेमिकाएं बद्दुआएं नहीं दे सकतीअगर देती तो वो प्रेमिकाएं नहीं होती प्रेमिकाएं प्रेम में पगी हुई पकवान...

दिल के तार: समीर द्विवेदी

दिल के तारों पर छेड़ा हैएक गीत मैंनेहाँ झूठी ही सही मगरहै पाई प्रीत मैंने इस मतलब की...

ईश्वर का वरदान है बहन: पूजा

बहन किसी फरिश्ते से कम नहीं,वह तो कई रिश्ते निभाती है।जब भी मुसीबत में होता हूं मैं,मदद के लिए सबसे पहले...

जसवीर त्यागी की कविताएं

मकसद जीवन में सब कुछ साफ सुथरा संपूर्ण नहीं मिलता बहुत कुछआधा-अधूरा भी मिलता है

पगली: जॉनी अहमद

प्रेम की वर्षा में क्या भीगीसौंप दिया तोहे तन मनबिरहन कमली जोगन पगलीकहत है अब तो सब जन।

कुष्मांडा: सोनल ओमर

कुम्हड़े की बलि पसंद जिसेकुष्मांडा कहलाती है।नवरात्रि के चौथे दिन देवीसिंह पे सवार आती है।। लाल महावर,...

जय माता दी: समीर द्विवेदी

गूँज रहा माँ का जयकारा जय माता दी।।सजा हुआ दरबार है प्यारा जय माता दी।। कौन है...

चंद्रघंटा: सोनल ओमर

नवरात्रि के तीसरे दिन देवीआप पूजी जाती हो।घंटे सा अर्द्ध चंद्र मस्तक परचंद्रघंटा कहलाती हो।। काया सोने-सी...

ये जो जीवन है: पूजा

ये जीवन जो अपना है, लगता जैसे इक सपना है। बाधाओं का सम-मिश्रण है, सुख-दुख तो आते जाते हैं। फिर भी जीवन, सपना लगता है, ये जीवन जो अपना...

ब्रह्मचारिणी: सोनल ओमर

पर्वतराज और मैना की पुत्री जब हो गई सयानी। नारद के कहने पर शिव को पति रूप में पाने की ठानी।। बैठे थे भोले शत-शत वर्षों से अपने ध्यान...

Recent

साहित्य

This function has been disabled for लोकराग.