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राष्ट्र बचाए रखना: गरिमा गौतम

हे गिरधारी मेरे राष्ट्र को बचाए रखना इस पर सदा अपनी कृपा बनाये रखना कल कल सरिता बहती जाए जन जन की प्यास बुझाती जाए सदानीरा इनको बनाए...

भगवान कहाँ है: हितेश सहगल

कभी कभी तो पूछता हूँ खुद से कि भगवान कहां है? क्या वो मंदिरों, मस्जिदों, मीनारों में है? या ज़मीन आसमान या दीवारों में है? क्या वो शहरों...

पूरी हो अरदास: सुरेंद्र सैनी

रह-रह के चुभ रही, मेरे सीने में एक फ़ांस कैसे सुलझेगी उलझन, क्या है इनका सारांश सारी युक्ति लगा देखी, नहीं मिला लाभांश जैसे रास्ता भटक गया, मेरा दूर बहुत आवास बिगड़ी...

पाँव के छाले: ईशिका गोयल

तपती दोपहर नंगे पांव जा रहे हैं अपने गाँव वो तुम्हारे साथ राष्ट्र के निर्माण में आगे रहे तुम महलो में सोए वो जागे रहे जब तक रुक...

दोस्ती- दीपा सिंह

दोस्ती जिंदगी जीने का दूसरा नाम है क्या पता कल क्या हो ऐ मेरे दोस्त तू सलामत रहना मुझे भूल मत जाना जो वक्त हमने साथ में गुजारें...

कोविद-19 का कहर- वीरेन्द्र प्रधान

एक के बाद एक अनेक कोष्ठकों में बन्द गणितीय समस्या सा बार-बार के लॉक डाउन में कैद है तन और मन समस्याओं का कुछ समाधान निकले यदि टूटें कुछ...

वंदन कोरोना योद्धा- डॉ शेख

ऐ भारत के वीरों, ऐ धरती माँ के दिलेरों, तुम ही हो असली हीरो, तुम्हे सलाम तुम्हे सलाम तुम्हे सलाम तुम निडर बड़े निराले हो, हर जान के रखवाले...

मौत में जिन्दगी ढूंढ़ लो: रवि प्रकाश

अपने गमों में खुशी ढूंढ़ लो हर जख्म में इक हँसी ढूंढ़ लो नेमत समझ शौक से लो उसे गर है कमी तो कमी ढूंढ़ लो खुशबू रहे...

यादें: मनोज कुमार

तेरे शहर से मेरे घर तक, कोई आता जाता रहता है, तेरी गलियों से निकल कर, रोज मेरी खिड़की तक आता है, हवा के झोंके के साथ रोज, बालकनी...

मौन के समक्ष: रक्षित राज

जब भी भाषा मौन के समक्ष बेबस हो तो हमें अपने मौन को चुम्बन में उड़ेल देना चाहिए प्रेम का आरंभ सूर्योदय है एवं अंत सूर्यास्त है अतः प्रेम की दुपहरी...

बाढ़: पंकज कुमार

आते है बाढ़ बहुत सोच-समझकर, संग ले कुछ मौन लफ्जो का बहार छोड़ जाते है कुछ उर्वर मिट्टियों का उपहार, लोगो का उजाड़ घर-संसार तोड़ देते है वे...

लॉकडाउन, मज़दूर और साहब: सीमा कृष्णा

साहब, आप जितनी दूरी हवाई-जहाज से तय करते हैं ना आपकी लापरवाही से हमें उतनी ही दूरी पैदल तय करना है इस तड़ताड़ाती धूप-घुमहरी में कंधे पर...

मोहब्बत और शहादत: मनोज शाह

आओ प्रियतम प्रेम उत्सव मनाएं आओ प्रियसी मोहब्बत मनाएं शांति की ध्वनि फैलाते जाएं प्रेम की ध्वनि फैलाते जाएं कल तुम रहो ना रहो हम रहें ना रहें आओ...

जन्नत- अनामिका वैश्य

जन्नत दिखती है मुझे माँ के गाँव में मिलती है जन्नत बस माँ के पाँव में जन्नत सा सुकूं मिलता है बेचैनियों में जब छुप जाती हूँ...

उम्मीद- सोनल ओमर

दो मुझे उम्मीद की किरण हे, भगवन! कर्तव्य-पथ पे अग्रसर हो सकूँ। मैं प्राणी मात्र हूँ, चला जाता अंधकार में उद्देश्य को कैसे मैं पूर्ण कर सकूँ? हे ईश तुम ही मेरी आस, तुम उम्मीद साथ देना प्रभु गंतव्य को पा सकूँ। -सोनल ओमर

रोटी- शिवम मिश्रा

रोटी ढूंढ़ रहा जिसे हर मजदूर रोटी तलाश रहा जिसे हर भिखारी रोटी गेहूं उगा रहा किसान जिसके लिए रोटी जिसके लिए हुआ कई युद्ध रोटी एक मां खिला रही बच्चे को रोटी बाप कर...

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