Home Tags Geet

Tag: Geet

ज़िन्दगी के गीत: स्नेहलता नीर

राग बिखरा बेसुरा हो, ज़िन्दगी के गीत कास्वप्न पर पाला जमा है, मुश्किलों की शीत का कर्ज...

पत्र तुम्हारे नाम: स्नेहलता नीर

सुधियों की गलियों ने मिलकर, पत्र तुम्हारे नाम लिखाबचपन के वो दिवस सलोने, धाम हमारा ग्राम लिखा

प्रेम-प्रीत की भाषा: वीरेंद्र प्रधान

रोज कमा कर खा लेंगे हमइसमें ही सुख पा लेंगे हममेहनत की रोटी नित खाकरनींद सहज ही बुला लेंगे हम

लौटते हैं श्रमिक: अंजना वर्मा

धमाके सुनके उड़े ज्योंपरिंदे भयभीत होकरलौटते हैं श्रमिक अपनेगाँव फिर मजबूर होकर गाज गिरती है समय कीवक्त...

नादान परिंदा: स्नेहलता नीर

बेज़ान शह्र में, पत्थर का बशर था।घर-घर में तनाज़ा, हर सम्त गदर था। नफ़रत के ज़ह्र का,...

याद तुम्हारी आये: रूची शाही

थपकी दे दो ना अपनीसोना मुश्किल लगता हैरो तो लेते हैं हम, परचुप होना मुश्किल लगता है

मन मंदिर में: स्नेहलता नीर

मन के मंदिर में श्रद्धा से, रघुनन्दन की मूर्ति सजाएँ रात अमावस तम गहराया, दिव्य दीप-वर्तिका जलाएँ एक नहीं दस-दस दसकंधर, आज स्वयं के भीतर पलते मर्यादित...

प्रेम सुधा रसधारे: स्नेहलता नीर

बरस बाद सावन बन, साजन आए हैं सखि पास हमारे। सरसाया मन का वृंदावन, पाकर प्रेम सुधा-रसधारे।। उत्सव मना रहीं हैं साँसें, धड़कन बजा रही शहनाई। पलक...

रंग जीवन के: मुकेश चौरसिया

कभी हलके कभी गहरे, बिखरे रंग जीवन के। सिखाते नित नये ककहरे रंग जीवन के।। सुहानी भोर सी खुशियाँ, जीवन में कभी लाली, कभी खत्म न हो जैसे, कभी...

जब प्यार की खुशबू: रामसेवक वर्मा

देख रही हो छुप-छुपकर क्यों, दिल का दर्द बढ़ा कर तुम महका दो ये गुलशन मेरा, जीवन पुष्प खिलाकर तुम चांद सी सुंदर एक प्यारी सूरत, मन को लुभाया...

मुश्किलों से गुजरता रहा इश्क: रामसेवक वर्मा

मुश्किलों से गुजरता रहा इश्क है, इसके अनुभव हमेशा डराते रहे देखकर उनकी भोली सूरत को हम, सपने बहुत से सजाते रहे कुछ कदम मैं चला, कुछ कदम...

प्रतीक्षा के घावों पर: स्नेहलता नीर

पिया गए परदेश न लौटे, अब तक मन अकुलाए। चिंतन में पीड़ा के बादल, लौट-पौट गहराए विरह-ज्वाल सुलगाती साजन, रूठी निंदिया रानी। तारे गिनती रात बिताती, मेरी...

हे मनमोहन कृष्ण मुरारी: स्नेहलता नीर

हे मनमोहन कृष्ण मुरारी, मेरी कुटिया में आ जाना। दधि माखन श्रीखंड मलाई, बैठ चाव से गिरधर खाना।। आज काल विकराल रूप धर, तांडव करता इस धरती पर। मेल-मिलाप रुद्ध...

रूठ गए श्याम मेरे: ज्योति अग्निहोत्री

रूठ गए श्याम मेरे, कैसे मैं मनाऊँगी? भई आधी रतिया है, मैं घर कैसे जाऊँगी? राधा नाहीं गोपी नाहीं, मीरा मैं बन जाऊंगी। विष का ये प्याला सखी, हँसके मैं पी...

साथी तुम आवाज़ न दो: रूची शाही

सौ आँसू रखकर आँखों मेंतोड़ गए तुम नेह के बंधनदीद को तेरे तड़प तड़प केबरस रहा आँखों से सावनजो होना...

चाहत है दिल में: रामसेवक वर्मा

रूठे सजन को, मनाऊं मैं कैसे चाहत है दिल में, दिखाऊं मैं कैसे मिले चाहे दुनिया में, कितने हमें ग़म नहीं जी सकेंगे, तुम्हारे बिना हम जमाने को...

ज्योतिष

साहित्य

This function has been disabled for लोकराग.