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याद तुम्हारी आये: रूची शाही

थपकी दे दो ना अपनीसोना मुश्किल लगता हैरो तो लेते हैं हम, परचुप होना मुश्किल लगता है

हिम्मत मत यूँ हार पथिक- स्नेहलता नीर

हिम्मत मत यूँ हार पथिक क्यों बेबस है मजबूर है। चलता चल तू देख सामने, लक्ष्य अभी कुछ दूर है। पथ के कंटक फूल बनेंगे, टूटेंगे अवरोध सभी। मन में...

हम निडर होकर बढ़ेंगे- स्नेहलता नीर

हौसले हैं साथ तो हम, मंजिलें पाकर रहेंगे। हों डगर में शूल फिर भी, हम निडर होकर बढ़ेंगे। कर्म को पूजा समझकर, हम अहर्निश काम करते। पर...

दीपक रखे जला कर हमने- स्नेहलता नीर

दीपक रखे जला कर हमने, कोई आकर बुझा गया। छीन लिया हमसे उजियारा, कुटिल तिमिर दे चला गया। हुए आधुनिक लोग जगत के, पत्थर हृदय जमाना है। भोले-भाले इंसानों को मिलता...

सत्ता तो गांधारी है- स्नेहलता नीर

भाँति-भाँति के रोग बाँटता, दृष्टि अमंगलकारी है दूषित पर्यावरण चतुर्दिक, छाया संकट भारी है। नदी चली उद्गम से पावन, कल-कल करती इठलाती। जीव-जगत की प्यास बुझाती, पुण्य धरा को सरसाती। अनगिन खुले...

मीत मन भाने लगा है प्रीत का मौसम- स्नेहलता नीर

खिल गए हैं फूल कोयल छेड़ती सरगम। मीत मन भाने लगा है प्रीत का मौसम। कर रहा है नवसृज ऋतुराज धरती पर। मन प्रफुल्लित मन रहा त्यौहार...

तुम पलाश बन खिल जाना- अनिता सैनी

सज़ा रही जीवन गुलदस्ता तुम  प्रीत  फूल ले आना मधुवन महके  जीवन का तुम पलाश बन खिल जाना तपन  बहुत, जीवन  की तुम  पतझड़  में  मुस्काना आंधी  का झोंका आये...

विचरण करता निर्जन में- स्नेहलता नीर

होता दुखी, बहाता आँसू, अस्त व्यस्त है क्रंदन में मन के आगे मनुज मौन है, विचरण करता निर्जन में करता नहीं कभी मन पावन, तन को...

कभी खुद से मिले क्या- शीतल वाजपेयी

मिले हो हर किसी से पर कभी खुद से मिले क्या? कभी पूछा है खुद से हैं कोई शिकवे-गिले क्या? कभी तनहाइयों में बैठ कर खुद...

भारत सब देशों से न्यारा- स्नेहलता नीर

भारत सब देशों से न्यारा जन गण मन का है अति प्यारा जाति धर्म हैं भिन्न हमारे फिर भी मिलकर रहते सारे कर्मवीर हम हैं रखवारे सबका सबसे भाईचारा भारत...

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