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इश्क़ का दर्द: रकमिश सुल्तानपुरी

वक़्त लगता पुरानी सदी की तरहआदमी न रहा आदमी की तरह हाव से, भाव से, बात व्यवहार...

बचपन: जॉनी अहमद

इससे पहले की इस जहाँ का सच समझ जाएआओ बचपन की कहानी में कहीं खो जाए हमको...

जन्नत समझ उसे: समीर द्विवेदी

कहते हैं जिसको प्यार, इबादत समझ उसेमिल जाए प्यार, रब की इनायत समझ उसे नाकाम ही रहे...

महसूस किया करना: जॉनी अहमद

मेरे आग़ोश की गर्मी को महसूस किया करनातुम मेरी तरफ़ से अपने होंठ चूम लिया करना हवा...

कोई जुगनू: रकमिश सुल्तानपुरी

दर्द के शहर में इक घर तलाश लेता हूँरातों को ख़्वाब का बिस्तर तलाश लेता हूँ इश्क़ में एकतरफ़ा यार जब हुआ तन्हा,मैं मेरे दर्द का सागर तलाश लेता हूँ

ज़रा सा इश्क़: रकमिश सुल्तानपुरी

ख़ुदा के सामने जिसने भी सर झुकाया हैउसी ने यार यहाँ मंज़िलों को पाया है तू मेरा...

बेटियाँ: गौरीशंकर वैश्य

बेटियाँ जब बड़ी हो गयींमोतियों की लड़ी हो गयीं आपदा जब भी आती दिखीसामने वे खड़ी हो...

ग़म बढ़ जाता है: जॉनी अहमद

पेड़ भला कब अपना फल खा पाता हैभेड़ भला कभी ऊनी मफ़लर लगाता है बच्चों जैसी हरकते...

रात की बेचैनी: जॉनी अहमद

हर रात की बेचैनीहमने अकेले जीनी। तुमने रिश्ता तोड़केहमसे साँसे छीनी। और ना...

जीवन का आंकड़ा: गौरीशंकर वैश्य

प्रेम नया व्यापार हुआघर-घर में बाजार हुआ पाप करे, आकर धो लेधन, गंगा की धार हुआ 

बहलाए कौन: गौरीशंकर वैश्य

दर्पण को झुठलाए कौनउलझन को सुलझाए कौन हवा बहुत दुःखदायी हैलोरी गा, बहलाए कौन

अरमान मेरे: कृष्ण गोपाल सोलंकी

अँधेरा घना हो तो शमा जलानी पड़ती हैज़िन्दगी आसां नहीं होती, बनानी पड़ती है ख़ैरियत पूछ कर...

गांव का घर: कृष्ण गोपाल सोलंकी

भाईचारा, प्रेम निजता का तराना छोड़करकर रहे हैं सब सियासत दोस्ताना छोड़कर घोटती है दम बेशक़ शहर...

इस वक़्त में चिट्ठियां: जॉनी अहमद

पुरानी बीमारियों की नई दवा कौन करेगागर माँ ना हो तो बोलो दुआ कौन करेगा बच्चे तो...

एक लम्हा इश्क़ का: रकमिश सुलतानपुरी

इश्क़ की हद जानता है बच्चा-बच्चा इश्क़ काकौन कहता है बुरा होगा नतीज़ा इश्क़ का इश्क़ के दरिया से है सबको गुज़रना एक...

ज़ख़्म, तन्हाई, जुदाई: रकमिश सुल्तानपुरी

ज़ख़्म, तन्हाई, जुदाई, सब किया है आपकाआप अपने दिल से पूछो मामला है आपका सिर्फ़ तन्हाई के बदले क्या...

ज्योतिष

साहित्य

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