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Tag: Hindi poetry

उनसे ही हाथ बढ़ाया न गया: राजीव सिन्हा

हम तो फैलाए हुए बैठे थे अपनी बाहेंबस उनसे ही अपना हाथ बढ़ाया न गया यूँ तो...

उदासियों के लिए- रूची शाही

ये गलत था कि मैं हमेशा अपने हालात से उपजी इन उदासियों के लिए चाहती थी तुमसे कोई उपचार अपनी जिद और अपनी बात ऊपर रखने के लिये विवश भी...

आ गया है राज मेरा- पुष्पेन्द्र सिंह

हो गई मेरी जमीं सब हो गया है ताज मेरा मैं अँधेरा कह रहा हूँ आ गया है राज मेरा ज़ुर्म के बादल बनेंगे ख़ून की बरसात होगी नफ़रतों का...

माँ के बिना कुछ नहीं- दीपमाला पाण्डेय

माँ ही गंगा, माँ ही गीता मेरी माँ में बसी कुरान, छू लेती हूं उनके चरणों को हो जाता है चारों धाम मेरी माँ से मैंने...

सही मायने में आजादी- मीरा सिंह

एवरेस्ट पर परचम फहराने वाली आजादी का दंभ भरने वाली आसमान में उड़ने वाली हर मुश्किल से जूझने वाली मुझसे नजरें मिला आज सच सच बता क्या सही मायने में तुझे मिल गई आजादी? सुनसान...

सफर- राधेश्याम तिवारी

आपके वातानुकूलित रिजर्वेशन बोगी के ठीक पीछे एक साधारण बोगी का यात्री हूँ मैं मेरे लिए लेटने या बैठने का नहीं है कोई निश्चित स्थान मेरी पहचान रिजर्वेशन चार्ट में कहीं नहीं...

मेरा बचपन- अनिता कुमारी

ऐ मेरे बचपन, क्यूं चला गया तू, मुझे यूं बिलखता छोड़। तुझसे ही तो बंधी थी, मेरी माँ के ‌‌ आंचल की डोर। छिपकर जिसमें पीती मैं अमृत, खेलती...

इतने दिनों के बाद- राजीव कुमार झा

इतने दिनों के बाद आज तुम घर पर आये अब फैली है मुस्कान कितने इंतजार के बाद खिले दरवाजे पर फूल महक उठे आँगन में आकर कल होली खेलेंगे हम सब उसी...

मुहब्बत में तेरी- राम सेवक वर्मा

मुहब्बत में तेरी जिए जा रहा हूँ गमे अश्क अपने पिए जा रहा हूं दिया है ज़माने ने दर्द ये मुझको, होठों को अपने सिए जा रहा...

सृजन की बातें- पीएस भारती

अब सृजन की बातें बीती हो गईं वीथिकाएं सुधि की तंद्रिल सो गईं वय की व्याधि थी कि काया भी हुई कृष और अर्जित जो किया था...

मुश्किलों के दौर में- आरबी सोहल

आज चेहरों पे खुशी के गुल खिलाता कौन है मुश्किलों के दौर में अब मुस्कुराता कौन है देखते हैं वे अंधेरा हर तरफ़ फैला हुआ हौसले के...

प्रेम-भक्ति शक्ति दे सुपंथ मातु शारदे- रकमिश सुल्तानपुरी

प्रेम-भक्ति शक्ति दे सुपंथ मातु शारदे भक्त की पुकार सुन कि शब्द-शब्द तार दे भानु सा प्रकाश्यमान दीप्यमान चन्द्र सा भाव को विधान दे कि ज्ञान को...

ये जिंदगी है कुछ यूँ- अनुभव मिश्रा

ये ज़िन्दगी है कुछ यूँ कुछ इस तरह इसमें चलना पड़ता है जब जब गिराए कोई उठकर तब तब सम्भलना पड़ता है बिखेरने को खड़ा है...

प्रीत करे सत्कार- डॉ उमेश कुमार राठी

जीवन परिपथ को जब करता घर का द्वार निराश आभासी दुनिया में करता निशदिन प्यार तलाश तृप्ति बने आधार हृदय की प्रीत करे सत्कार फूल तपश में फिर भी लाता बारंबार...

भ्रम की दिशा नहीं होगी- पीएस भारती

नव चिंतन भर नेत्र खुलें जब उस दिन निशा नहीं होगी कितने ही पथ मोड़ पड़े पर भ्रम की दिशा नहीं होगी नवल प्रात की मलय सुगंध उगा सूर्य...

प्रथम प्यार की- पीएस भारती

आह क्या कहूं मन के अंदर हुमक उठे चहुँ ओर आ जातीं तुम प्राण सदा ही प्राणों को झकझोर तुम बनकर आईं थीं मेरी चंद्र किरण...

ज्योतिष

साहित्य

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