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Tag: HindiPoem

पुष्प: जॉनी अहमद

मैं रूप का वो कोष हूँ जो रिक्त नहीं होताशब्दों से मेरा सौंदर्य व्यक्त नहीं होता वसुंधरा...

बेटियाँ: गौरीशंकर वैश्य

बेटियाँ जब बड़ी हो गयींमोतियों की लड़ी हो गयीं आपदा जब भी आती दिखीसामने वे खड़ी हो...

रुक्मणी के मन की व्यथा: राजीव सिन्हा

लो फिर एक बार फागुन लौटकर आया हैमन रुक्मणी का विह्वल हो भर आया है व्यथित मन...

मैं अलबेली: प्रार्थना राय

सनन-सनन बहे पुरवाई बसंत ऋतु ने ली अंगड़ाईमन के उदयाचल पर राग भैरवी कोई तान सुनाएं फूलों...

तुम हृदय रिझाने आ जाओ: प्रार्थना राय

श्याम गात रंग अति शोभितललित छवि हर्षित मन मेराहै चरण को तेरे वंदन प्रियतुम गोविदं रूप में आ जाना

बेटियाँ जब विदा होती हैं: जसवीर त्यागी

बेटियाँ जब विदा होती हैंघर से सूनेपन की बारिश मेंभीग जाता है घर-आँगन

रोशनी का तमाशा: प्रार्थना राय

रोशनी का तमाशा कितना अजीबसीख लिया है अंधेरा उगलना समझ ना सकी दांव पे दांव का खेलधोखे...

मुक्तक: रूची शाही

💠बड़ी मुश्किलों से दिल के जख्म सी रहें हैतुमसे जुदा हैं फिर भी तुमको ही जी रहें हैंमर भी गए तो...

तेरी आंँखों के पानी में: प्रार्थना राय

तू माने या न माने मैं तुझसे ये बात कहती हूं,तेरी आँखों के पानी में हमारा नाम लिक्खा है

प्रेम में मेरे: सुजाता प्रसाद

मेरा आत्मविश्वास प्रेम में मेरेसाथ मेरे चलता ही रहता हैदोस्त सा पकड़ के हाथ मेरामुझसे कुछ कहता ही रहता है

दास्तान हकीकत की: प्रार्थना राय

दास्तान हकीकत कीज़माना सुनाएगाफ़रेब के फरिश्तों के बीचसच की कहानी छोड़ जाएंगे रोशनी का जहांबसा के जाएंगेअंधेरा...

नारी दिवस: गौरी शंकर वैश्य

नारी दिवसवर्ष में एक दिनक्यों नहीं नित्य कर्मठ नारीघर की उजियारीकभी न हारी

मन की बात: प्रार्थना राय

मन की व्यथा के कड़वे सत्य कोशब्दों के ज़रिए कागज पे बिखेर रहीलिख रही, मन मसोसकरअंतस की टीस चीख  रही

उपेक्षा: जसवीर त्यागी

एक हरे-भरे पौधे कोतुम घर लाते होचाव से देते हो खाद-पानी मुरझाने से बचाते होउसे बढ़ता, खिलता,...

कोई ख़्वाब बुनें: रकमिश सुलतानपुरी

खट्टा हो व्यवहार जमाने से अच्छाअपना यूँ क़िरदार छिपाने से अच्छा जलता है परवाना तो जल जाने दो,झूठी शम्मा यार जलाने से अच्छा

मनमोहिनी: प्रियंका त्रिपाठी

मन को छू ले ऐसी है कायाऐसे ही फलती रहे देती है छाया तुझे बार बार मै...

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