Home Tags Kavya

Tag: Kavya

तुम्हारी आँखों में: रूची शाही

खुद ही खुद से जुदा हो रहे हैं हमअधूरी ख्वाहिशों की सदा हो रहे हैं हममुहब्बत का कर्ज चढ़ गया था...

लौटते हैं श्रमिक: अंजना वर्मा

धमाके सुनके उड़े ज्योंपरिंदे भयभीत होकरलौटते हैं श्रमिक अपनेगाँव फिर मजबूर होकर गाज गिरती है समय कीवक्त...

मेरे विचार: हेमकंवर

विचारों की जो बातें हैं,विचारों से ही करती हुँ,कभी बादल, समन्दर के,मैं व्यवहारों से करती हूँदेशभक्ति, राजनीति,धर्म, कर्म विचारों में,विचारों से...

तमाम शहर में: जॉनी अहमद

तू जब भी गुल निहारने लगे बगीचों मेंतुझको हर मर्तबा नुकीले काँटे ही चुभे कभी अगर जो...

सत्य सनातन राम: प्रार्थना राय

लाख करें संघर्ष तो क्याप्रयोजन अपना पाना हैपथ में आये कितने रोडे़मार्ग में नहीं अकुलाना है लाख...

जब तुम्हारी याद आती है: प्रार्थना राय

जब तुम्हारी याद आती हैदबे पाँव प्रिये, सच कहती हूंसूखे पत्तों की तरह बिखर जाती हूं हृदय...

मन की चौखट पर: प्रार्थना राय

डाली डाली कुसुम खिले, बाहों की लहरें तुम्हें पुकारेभोर की पहली किरण संग, सूरज की लाली तुम्हें बुलायेगुलाबी देह मरुस्थल हुई,...

राजनीति: प्रार्थना राय

दिन-ब-दिन राजनीति गेम मेंपरिवर्तित होती जा रही हैये मेरा अनुभव नहीं बता रहा है,प्रत्येक अशांत आदमी के चेहरे की झुर्रियां बता...

गौरैया: गौरीशंकर वैश्य

नन्ही-सी गौरैया हैप्यारी-सी गौरैया हैघर-आँगन में फुदक रही,भोली-सी गौरैया है चिचियाती होते ही भोरचींचीं, चींचीं करती शोरकभी...

सहज प्रेम: रकमिश सुलतानपुरी

सहज प्रेम से दूर आदमी लिए स्वयं की बात अड़ा है दुनिया की इसचकाचौंध मेंहमने देखे खूब मुखौटेराह भटकतेमिले...

बेटियां: प्रार्थना राय

बेटियां ये बेटियां घर की हैं अँजोरियांबेटियां ये बेटियां घर की हैं तिजोरियां तुम नवल विहान होभोर...

एक लम्हा इश्क़ का: रकमिश सुलतानपुरी

इश्क़ की हद जानता है बच्चा-बच्चा इश्क़ काकौन कहता है बुरा होगा नतीज़ा इश्क़ का इश्क़ के दरिया से है सबको गुज़रना एक...

कितना कुछ अनकहा है: प्रार्थना राय

नौ कमरे हैंनौ दरवाजे हैंनौ खिड़कियां भी हैंफिर भी बैठने को सहन नहीं कुछ तुम्हारे शब्द हैंकुछ...

तुम कैसी हो: प्रार्थना राय

जब गहरी सांस लेकरपूछते हो तुम कैसी हो मन झुंझला उठता हैबड़े अंजान बनते होजैसे कुछ जानते...

स्त्री के हिस्से बस दो ही किस्से: प्रार्थना राय

स्त्री के हिस्से, बस दो ही किस्सेआँचल में दूध आँखों में पानीतूने सबको फूल बांटे, तेरे हिस्से कांटेजिसको स्वीकारा तुमने, हँसते-हँसते

अल्पविराम: नीतू कुमावत

कर लेती हूं 'म्याऊं म्याऊं'जब दिखती है मिनी मासीथोड़ा सा 'भौ भौ' भी कर लेती हूँनज़र बचा कर लोगों सेजब डॉगी...

Recent

साहित्य

This function has been disabled for लोकराग.