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शहर समता विचार मंच महिला गोष्ठी कानपुर इकाई की अक्टूबर माह...

शहर समता विचार मंच महिला गोष्ठी कानपुर इकाई की महिला काव्य गोष्ठी सीमा वर्णिका के संयोजन में रचना सक्सेना की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक...

ट्यूब लाइट: जसवीर त्यागी

घर मेंएक बहुत पुरानी ट्यूब लाइट है साल में दो-तीन बारलप-लप, झप-झप करती हुईबहुत देर से जलती...

प्रेमिकाएं: रूची शाही

प्रेमिकाएं बद्दुआएं नहीं दे सकतीअगर देती तो वो प्रेमिकाएं नहीं होती प्रेमिकाएं प्रेम में पगी हुई पकवान...

दिल के तार: समीर द्विवेदी

दिल के तारों पर छेड़ा हैएक गीत मैंनेहाँ झूठी ही सही मगरहै पाई प्रीत मैंने इस मतलब की...

ईश्वर का वरदान है बहन: पूजा

बहन किसी फरिश्ते से कम नहीं,वह तो कई रिश्ते निभाती है।जब भी मुसीबत में होता हूं मैं,मदद के लिए सबसे पहले...

जसवीर त्यागी की कविताएं

मकसद जीवन में सब कुछ साफ सुथरा संपूर्ण नहीं मिलता बहुत कुछआधा-अधूरा भी मिलता है

पगली: जॉनी अहमद

प्रेम की वर्षा में क्या भीगीसौंप दिया तोहे तन मनबिरहन कमली जोगन पगलीकहत है अब तो सब जन।

कुष्मांडा: सोनल ओमर

कुम्हड़े की बलि पसंद जिसेकुष्मांडा कहलाती है।नवरात्रि के चौथे दिन देवीसिंह पे सवार आती है।। लाल महावर,...

जय माता दी: समीर द्विवेदी

गूँज रहा माँ का जयकारा जय माता दी।।सजा हुआ दरबार है प्यारा जय माता दी।। कौन है...

चंद्रघंटा: सोनल ओमर

नवरात्रि के तीसरे दिन देवीआप पूजी जाती हो।घंटे सा अर्द्ध चंद्र मस्तक परचंद्रघंटा कहलाती हो।। काया सोने-सी...

ये जो जीवन है: पूजा

ये जीवन जो अपना है, लगता जैसे इक सपना है। बाधाओं का सम-मिश्रण है, सुख-दुख तो आते जाते हैं। फिर भी जीवन, सपना लगता है, ये जीवन जो अपना...

ब्रह्मचारिणी: सोनल ओमर

पर्वतराज और मैना की पुत्री जब हो गई सयानी। नारद के कहने पर शिव को पति रूप में पाने की ठानी।। बैठे थे भोले शत-शत वर्षों से अपने ध्यान...

शैलपुत्री: सोनल ओमर

पर्वतराज हिमालय के, घर बेटी एक आई। दाएं हाथ में त्रिशूल, बाएं हाथ में कमल लाई। वृषभ है वाहन इसका, इसलिए वृषारूढ़ा कहलाई। प्रथम नवरात्रि पर जगत ने, शैलपुत्री की ज्योत...

लाल बहादुर शास्त्री: गौरीशंकर वैश्य

शुभ दिन दो अक्तूबर को जन्मे, प्रिय शास्त्री लालबहादुर थे। माँ रामदुलारी और पिता शारदा प्रसाद भावातुर थे। थे पले अभावों में 'नन्हे' जब पिता जी स्वर्ग सिधार गए। नाना-नानी...

प्रसाद में तुलसी दल जितना: रूची शाही

बस एक बार तुम्हें छू करदेखने का मन है मेरामैं चाहती हूं महसूस करना तुम्हेंतुम कहीं रुई से भी मुलायम तो...

म्यूच्यूअल फंड: सोनल ओमर

प्रेम में छले जाने से ज़िंदगी प्रचंड हो गई है।कुछ इस क़दर टूटी है कि खंड-खंड हो गई है।।

ज्योतिष

साहित्य

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