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वासंती दोहे: गौरीशंकर वैश्य

खिले लाल-पीले सुमन, कर श्रंगार नवीनरंगबिरंगे बिछ गये, ज्यों सुंदर कालीन दृष्टि जिधर भी डालिए, क्यारी कहे...

वासंती दोहे- स्नेहलता नीर

फूले टेसू-मोगरा, फूल गयी कचनार। गेंदा चंपा खिल गये, फूला हरसिंगार।। बेला, जूही, केतकी, फूले लाल गुलाब। फूल गयी गुलदाउदी, दिल में जागे ख़्वाब।। सेंवल सरसों भी खिले,...

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