Friday, August 7, 2026
HomeTechnology₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? क्या है जानिए सरकार...

₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? क्या है जानिए सरकार का नया प्रस्ताव

अगर आप रोजाना Paytm, PhonePe, Google Pay या किसी अन्य UPI ऐप के जरिए भुगतान करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। हाल ही में UPI ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने की चर्चाओं ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। अभी सरकार ने कोई नया शुल्क लागू नहीं किया है। केवल Payment and Settlement Systems Act में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया गया है। यदि संसद इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो सरकार भविष्य में अलग अधिसूचना जारी कर MDR लागू कर सकती है। यानी फिलहाल UPI से भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त है।


₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर क्या बदल सकता है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार और डिजिटल पेमेंट सेक्टर से जुड़े पक्षों के बीच एक प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है। इस प्रस्ताव में ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% तक Merchant Discount Rate (MDR) लगाने का विकल्प शामिल है।

हालांकि, यह केवल एक प्रस्ताव है। अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को सच मानने से पहले आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी है। यदि भविष्य में यह नियम लागू होता है, तो भी सरकार पहले इसकी अधिसूचना जारी करेगी।


ग्राहकों से नहीं, व्यापारियों से लिया जा सकता है शुल्क

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव के अनुसार MDR का भुगतान सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। यह शुल्क केवल उन व्यापारियों (Merchants) पर लागू हो सकता है जो UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं।

यानी यदि कोई ग्राहक ₹2,500 या ₹5,000 का UPI पेमेंट करता है, तो उसके खाते से अलग से कोई MDR नहीं कटेगा। हालांकि, कुछ बड़े व्यापारी अपनी लागत को संतुलित करने के लिए भविष्य में उत्पादों या सेवाओं की कीमतों में बदलाव कर सकते हैं। लेकिन यह उनका व्यावसायिक निर्णय होगा, सरकार का नियम नहीं।


किन व्यापारियों पर लागू हो सकता है नया नियम?

प्रस्ताव के मुताबिक, MDR केवल बड़े कारोबारियों पर लागू किया जा सकता है। शुरुआती चर्चा के अनुसार, जिन व्यापारियों का वार्षिक कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है, वे इस दायरे में आ सकते हैं।

इसके अलावा सरकार एक दूसरे मॉडल पर भी विचार कर रही है। इसमें ट्रांजैक्शन की राशि के बजाय व्यापारी के सालाना कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जा सकता है। साथ ही MDR की अधिकतम सीमा तय करने पर भी चर्चा जारी है। हालांकि अंतिम नियम क्या होगा, इसका फैसला अभी बाकी है।


सरकार इस बदलाव पर क्यों कर रही है विचार?

फिलहाल भारत में UPI ट्रांजैक्शन पर Zero MDR व्यवस्था लागू है। इसका मतलब है कि व्यापारी UPI भुगतान स्वीकार करने पर कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं देते। यही वजह है कि UPI तेजी से लोकप्रिय हुआ है।

हालांकि, बैंक और डिजिटल पेमेंट कंपनियों का कहना है कि इतने बड़े नेटवर्क को बनाए रखना और लगातार उसका विस्तार करना बिना किसी राजस्व मॉडल के चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। दूसरी ओर, डेबिट और क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर व्यापारी पहले से MDR का भुगतान करते हैं। इसलिए कुछ संस्थाएं UPI के लिए भी सीमित MDR लागू करने की मांग कर रही हैं।


भारत में कितना बड़ा हो चुका है UPI नेटवर्क?

UPI आज भारत का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बन चुका है। गांव से लेकर बड़े शहरों तक करोड़ों लोग रोजाना इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने UPI के जरिए 23.7 अरब (23.7 Billion) से अधिक ट्रांजैक्शन किए गए। इनकी कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही।

दिलचस्प बात यह है कि ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन कुल संख्या का केवल लगभग 5% हैं। हालांकि कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 65% बताई जाती है। यही कारण है कि सरकार और उद्योग जगत इस श्रेणी के ट्रांजैक्शन को लेकर अलग मॉडल पर विचार कर रहे हैं।


फिलहाल क्या है वास्तविक स्थिति?

वर्तमान समय में ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया गया है। सरकार ने केवल ऐसा कानूनी प्रावधान तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर MDR लागू किया जा सके।

यदि संसद इस संशोधन को मंजूरी देती है, तब भी शुल्क तुरंत लागू नहीं होगा। इसके लिए सरकार को अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। इसलिए अभी UPI यूजर्स को किसी अतिरिक्त चार्ज की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

फिलहाल Paytm, PhonePe, Google Pay और अन्य UPI ऐप्स के जरिए पहले की तरह बिना किसी MDR के भुगतान किया जा सकता है। आने वाले समय में यदि इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक फैसला होता है, तो उसकी जानकारी सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से जारी की जाएगी।

Related Articles

Latest News