जबलपुर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े घोटाले के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपना रुख सख्त कर फैसला जारी किया है। इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन कॉलेजों को सीबीआई की जांच के दौरान फर्जी पाया गया है, वे अब अपने छात्रों को नामांकित नहीं कर सकेंगे। यह फैसला छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दरअसल, कोर्ट ने इस मुद्दे पर एक विशेष आदेश जारी करते हुए कहा कि जिन कॉलेजों ने जांच के दौरान यह स्वीकार किया कि उनके पास कोई भी छात्र नहीं था। वे कॉलेज अब छात्रों की सूची प्रस्तुत कर लाभ नहीं ले सकते।
उल्लेखनीय है कि नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता घोटाले से जुड़े मामलों में 26 मार्च को जारी हुए आदेश पर लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने आदेश का इस्तेमाल और व्याख्या गलत ढंग से किये जाने की शंका जताई थी, जिसको लेकर उन्होंने कोर्ट से इस आदेश को संशोधित करने की मांग की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए,जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल की डिविजनल बेंच ने यह स्पष्ट किया है। बेंच ने कहा कि 26 मार्च को जारी किए गए पिछले आदेश में कुछ अस्पष्टताएं थीं, जिसके कारण गलत व्याख्या की जा सकती थी।
हाईकोर्ट ने एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी को यह निर्देश दिया कि वह सीबीआई की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करें। सीबीआई के अधिवक्ता को यूनिवर्सिटी को यह रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया, ताकि विश्वविद्यालय इस रिपोर्ट के आधार पर उचित निर्णय ले सके और फर्जी कॉलेजों को बचाने का कोई अवसर न मिले।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि सीबीआई ने कुछ कॉलेजों को अस्तित्वहीन पाया है। ऐसे कॉलेजों के नामांकन पर भी रोक लगा दी गई है। न्यायालय का कहना है कि जब सीबीआई की जांच के दौरान किसी कॉलेज ने खुद ही यह स्वीकार कर लिया कि उनके पास कोई छात्र नहीं था, तो वे अब छात्रों की सूची प्रस्तुत कर फर्जी नामांकन नहीं करा सकते।
एक अन्य याचिका में याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि जिन कॉलेजों को अनुपयुक्त पाया गया है, उनके छात्रों को अन्य वैध कॉलेजों में समायोजित किया जाए। याचिकाकर्ता के अनुसार इन छात्रों के भविष्य को लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि एक महीने के भीतर इस प्रक्रिया को पूरा किया जाए, ताकि छात्रों को शिक्षा से वंचित न होना पड़े।
हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सीबीआई द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड की तुलना प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा कॉलेजों के निरीक्षण के बाद प्रस्तुत किए रिकॉर्ड से की जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील विशाल बघेल को निर्देश दिया कि वे महाधिवक्ता के कार्यालय में जाकर सभी रिकॉर्ड्स का अध्ययन करें। इसके बाद एक तुलनात्मक सूची तैयार करें। इस सूची में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन कॉलेजों को अनुचित रूप से वैध कॉलेज घोषित किया गया है और निरीक्षण टीम ने किस प्रकार की गड़बड़ियां की हैं। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 04 अप्रैल 2025 की तारीख तय की है।