Friday, October 9, 2026
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नक्सलवाद के खिलाफ बड़ा फैसला, खूंखार प्रभाकर को 7 साल की जेल

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहे कुख्यात नक्सली प्रभाकर और उसकी पत्नी राजे कांगे को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही इसी मामले में शामिल तीन अन्य नक्सलियों को भी कोर्ट ने 5-5 साल की सजा सुनाई है। बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच इस फैसले को पुलिस और अभियोजन पक्ष की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

2015 की मुठभेड़ से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा मामला साल 2015 का है। ग्राम बेसगांव के पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस घटना के बाद कोरर थाने में अपराध क्रमांक 108/2015 दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में नक्सलियों के खिलाफ UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की थी।

मामले की जांच लंबे समय तक चली और पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाकर कोर्ट में मजबूत चार्जशीट पेश की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा, जिसके आधार पर कोर्ट ने पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

चार दशक से नक्सली संगठन में सक्रिय था प्रभाकर

पुलिस के मुताबिक, सजा पाने वाला नक्सली प्रभाकर बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का बड़ा चेहरा रहा है। एसपी निखिल राखेचा के अनुसार, प्रभाकर चार दशक से भी ज्यादा समय से नक्सली संगठन में सक्रिय था। उसे SGCM और DKSZC रैंक का खूंखार नक्सली बताया गया है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार प्रभाकर के खिलाफ बस्तर क्षेत्र के अलग-अलग थानों में 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय तक नक्सली संगठन में सक्रिय रहने के कारण वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण और वांछित आरोपी रहा है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था।

पत्नी राजे कांगे भी थी बड़ी नक्सली लीडर

प्रभाकर की पत्नी राजे कांगे भी नक्सली संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। पुलिस के अनुसार वह DVCM रैंक की नक्सली थी और रावघाट एरिया के साथ-साथ नक्सलियों की सप्लाई टीम में सक्रिय रही थी।

राजे कांगे के खिलाफ भी अलग-अलग थानों में 30 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस ने उस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। दोनों लंबे समय तक नक्सली संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रहे और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती माने जाते थे।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने मजबूत किया पुलिस का केस

इस मामले में पुलिस की जांच और अभियोजन की पैरवी को अहम माना जा रहा है। जांच अधिकारियों ने मामले से जुड़े साक्ष्यों को बारीकी से जुटाया और आरोपियों के खिलाफ मजबूत चार्जशीट अदालत में पेश की। खास बात यह रही कि केस में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी इस्तेमाल किया गया।

पुलिस और अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने इन साक्ष्यों और जांच से जुड़े तथ्यों को प्रभावी तरीके से रखा। इसी मजबूत पैरवी के चलते अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग अवधि की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई में अहम पड़ाव

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। खास तौर पर लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे बड़े नक्सली नेताओं को अदालत से सजा मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि गंभीर मामलों में आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के जरिए सजा दिलाई जा सके। कांकेर का यह फैसला इसी दिशा में एक अहम उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।

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