योगिनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना से पूर्ण होते हैं समस्त मनोरथ

सनातन संस्कृति में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार यूं तो वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं और हर एकादशी का अपना एक विशेष महत्व है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी कहते हैं। पौराणिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने से भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से मनुष्य के समस्त मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं।

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष योगिनी एकादशी का व्रत शुक्रवार 24 जून को रखा जाएगा। योगिनी एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना की जाती है। योगिनी एकादशी के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल प्रदान करने वाला है।

योगिनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा-आराधना की जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और पीपल के वृक्ष को काटने जैसे पाप तक से मुक्ति मिल जाती है। इस व्रत के प्रभाव से किसी के दिये हुए श्राप का निवारण भी हो जाता है। योगिनी एकादशी देह की समस्त आधि-व्याधियों को नष्ट कर सुंदर रुप, गुण और यश देने वाली होती है।

पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि इस बार शुक्रवार 24 जून को है। आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि गुरुवार 23 जून को रात 9:41 बजे से प्रारंभ होकर शुक्रवार 24 जून को रात 11:12 बजे तक रहेगी। योगिनी एकादशी व्रत के दिन साध्य योग और शुभ योग बन रहा है। जो लोग व्रत रहेंगे, उनके लिए 25 जून शनिवार को प्रात: 5:41 बजे से प्रात: 8:12 बजे के बीच व्रत का पारण का शुभ मुहूर्त है।