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इंदौर में पेयजल त्रासदी, हाईकोर्ट में नगर निगम ने कहा, गंदे पानी से सिर्फ 4 मौतें हुईं

जबलपुर। एमपी का सबसे स्वच्छ शहर माना जाने वाला इंदौर में पेयजल त्रासदी से जूझ रहा है। भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से अब तक 16 लोग जान गंवा चुके हैं और 1500 से अधिक बीमार हैं। 203 अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 25 आईसीयू में हैं। इसके बावजूद इंदौर नगर निगम का कहना है कि सब ठीक है।

जबलपुर हाई कोर्ट में नगर निगम के विवादित अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव ने जो स्टेटस रिपोर्ट पेश की है, उसमें सिर्फ 4 लोग उर्मिला देवी, तारादेवी, नंदलाल व हीरालाल की मौत ही डायरिया से हुई है। जस्टिस डीडी बंसल और जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी की अवकाशकालीन डिवीजन बेंच में पेश रिपोर्ट में निगम ने दावा किया है कि भागीरथपुरा में सब अच्छा हो गया। पानी भी साफ आ रहा है। पूरे मोहल्ले में कहीं भी गंदे पानी की शिकायत नहीं है।

इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी द्वारा दायर जनहित याचिका पर अब हाई कोर्ट की नियमित खंडपीठ 6 जनवरी को सुनवाई करेगी। 5 महीने के बालक अव्यान की मृत्यु को भी नगर निगम ने गंदे पानी की वजह से नहीं माना। जबकि उसके पिता को दो लाख रुपए का चेक देने के लिए जनप्रतिनिधि गए थे। उसके पिता ने चेक लेने से इनकार कर दिया था। अव्यान की मां उसे दूध में पानी मिलाकर दे रही थी ताकि जल्दी पच जाए। इस कारण उसे उल्टीए दस्त और तेज बुखार आया था।

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