भोपाल। मध्य प्रदेश में इस साल सरकारी स्कूलों की नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं पूरी तरह नई व्यवस्था के तहत आयोजित की जा रही हैं। पहली बार इन परीक्षाओं को बोर्ड परीक्षा के समान मानते हुए तैयारी की गई है। परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र सुरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया—हर स्तर पर सख्त नियम लागू किए गए हैं। शिक्षा विभाग का दावा है कि इस नई प्रणाली से परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, अनुशासित और भरोसेमंद बनेगी।
बोर्ड जैसी सख्ती क्यों जरूरी मानी गई
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार, पिछले वर्षों में स्कूल स्तर की परीक्षाओं में:
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प्रश्नपत्र लीक
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मूल्यांकन में असमानता
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परिणामों में देरी
जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए 9वीं और 11वीं की परीक्षाओं को बोर्ड पैटर्न पर आयोजित करने का फैसला लिया गया है।
थानों में सुरक्षित रहेंगे प्रश्नपत्र
अपर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय डीएस कुशवाहा ने बताया कि परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों को बोर्ड परीक्षा की तरह पुलिस थानों में सुरक्षित रखा गया है।
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प्रश्नपत्रों के बंडल परीक्षा शुरू होने से ठीक 60 मिनट पहले निकाले जाएंगे
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केंद्राध्यक्ष की निगरानी में प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचेंगे
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छात्रों को प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से 5 मिनट पहले वितरित किए जाएंगे. इस व्यवस्था से किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना कम होगी।
एक ही पाली में होगी परीक्षा
नौवीं और ग्यारहवीं की परीक्षाएं:
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दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक
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एक ही पाली में संचालित की जाएंगी
छात्रों को परीक्षा केंद्र पर आधा घंटा पहले पहुंचना अनिवार्य होगा, ताकि प्रवेश और उपस्थिति प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
चार सेट में तैयार हुए प्रश्नपत्र
नकल रोकने के लिए सभी विषयों के प्रश्नपत्र:
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चार अलग-अलग सेट (A, B, C, D) में तैयार किए गए हैं
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छात्रों को रोटेशन सिस्टम के तहत प्रश्नपत्र दिए जाएंगे यह व्यवस्था भी पूरी तरह बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर आधारित है।
बोर्ड जैसी अंक योजना से होगा मूल्यांकन
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प्रश्नपत्र मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा तैयार किए गए हैं
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मूल्यांकन माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के अनुसार किया जाएगा
शिक्षा विभाग का कहना है कि इससे मूल्यांकन में एकरूपता और निष्पक्षता बनी रहेगी।
उपकेंद्रों पर होगा उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन
इस बार उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन:
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विकासखंड स्तर पर बनाए गए उपकेंद्रों पर होगा
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हर जिले के उत्कृष्ट विद्यालय को समन्वयक केंद्र बनाया गया है
परीक्षा के बाद:
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केंद्राध्यक्ष उत्तरपुस्तिकाएं अपनी निगरानी में उत्कृष्ट विद्यालय में जमा कराएंगे
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वहां से अलग-अलग स्कूलों को उत्तरपुस्तिकाएं मूल्यांकन के लिए आवंटित की जाएंगी
बोर्ड परीक्षाओं का काम नहीं होगा प्रभावित
9वीं और 11वीं की परीक्षा व्यवस्था के तहत:
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10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में लगे शिक्षकों को इससे मुक्त रखा गया है
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पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षकों को दी जाएगी
इससे बोर्ड परीक्षाओं की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।
20 लाख छात्रों के लिए सख्त लेकिन पारदर्शी व्यवस्था
प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में इस साल करीब 20 लाख छात्र 9वीं और 11वीं की परीक्षाओं में शामिल होंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सख्त और पारदर्शी व्यवस्था बेहद जरूरी थी।
डीएस कुशवाहा के अनुसार,
“यह व्यवस्था छात्रों को आगे की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से तैयार करेगी और परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बढ़ाएगी।”











